पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा भूचाल आया है. टीएमसी को बड़ झटका लगा है. टीएमसी के 20 सांसद बागी हो गए हैं. इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और अपने गुट को नई पार्टी नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय कर दिया. अब लोग ये जानना चाहते हैं कि एनसीपीआई कौन सी पार्टी है? इस पार्टी को कौन चलाता है? इसके अध्यक्ष कौन हैं? क्या इस पार्टी ने कोई चुनाव लड़ा है? चलिए आपको इस पार्टी के बारे में सबकुछ बताते हैं.
पति-पत्नी ने बनाई थी पार्टी-
टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने जिस NCPI में खुद का विलय किया है. उस पार्टी की नींव त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से पहले 20 जनवरी साल 2023 में रखी गई थी. पति-पत्नी ने मिलकर इस पार्टी की नींव रखी थी. बंगाल के उत्तिया कुंडू और उनकी पत्नी शेली कुंडू ने पार्टी खड़ी की थी. उत्तिया कुंडू पार्टी के अध्यक्ष हैं. जबकि उनकी पत्नी शेली पार्टी की कोषाध्यक्ष हैं. चुनाव आयोग में एक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के तौर पर रजिस्टर्ड है.
कौन हैं उत्तिया कुंडू?
उत्तिया कुंडू सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर खुद को बंगाली अखबार जागो बिस्वा के एडिटर बताते हैं. वो खुद को एक सामाजिक कार्यकर्ता भी लिखते हैं. कुंडू सोशल मीडिया पर रील भी बनाते हैं. जबकि उनकी पत्नी शेली कुंडू वकील हैं.
कहां है पार्टी का ऑफिस?
नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी का ऑफिस हावड़ा के बानीपुर में है. पार्टी ने त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरी थी. लेकिन कुछ खास नहीं कर पाई थी. त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 7 उम्मीदवार उतारे थे. लेकिन 4 सीटों पर उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज हो गए थे. एक सीट पर पार्टी ने निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन किया. जबकि 2 सीटों पर उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे. छवामनु सीट पर 536 वोट और कैलाशहर सीट पर 286 वोट मिले थे. इस चुनाव के बाद पार्टी ने कोई चुनाव नहीं लड़ा.
अचानक NCPI के 20 सांसद हो गए-
जिस पार्टी को त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में 2 हजार वोट भी नहीं मिले थे. अचानक से इस पार्टी की चर्चा पूरे देश में होने लगी है. इस पार्टी के 20 सांसद हो गए हैं. एनसीपीआई लोकसभा नें 5वीं सबसे बड़ी पार्टी हो गई है. लोकसभा में सबसे ज्यादा सांसद बीजेपी के पास है. जबकि दूसरे नंबर पर कांग्रेस है. तीसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी का नंबर आता है. पहले चौथे नंबर पर टीएमसी का नंबर था. लेकिन अब टीएमसी से टूट हो गई है तो लोकसभा में चौथे नंबर की सबसे बड़ी पार्टी डीएमके हो गई है. जबकि 5वीं सबसे बड़ी पार्टी NCPI बन गई है.
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