आईएएस रिंकू सिंह राही ने इस्तीफा दे दिया है. लेकिन यह इस्तीफा अपने आप में अनोखा है. अनोखा इसलिए कि जो वजह बताई गई, उसमें कहा गया कि जब बतौर आईएएस काम करने का मौका नहीं मिल रहा, उनकी कोई उपयोगिता नहीं है तो वह इस नौकरी में नहीं रहना चाहते. लेकिन यह त्यागपत्र उनका तकनीकी त्यागपत्र है. तकनीकी त्यागपत्र का मतलब कि वह पूर्ववर्ती सेवा में जाना चाहते हैं यानी वह पीसीएस अधिकारी बन जाना चाहते हैं. रिंकू सिंह कैसे पूर्ववर्ती सेवा में जा सकेंगे? क्यों आईएएस की नौकरी छोड़ना चाहते हैं? इन तमाम सवालों के जवाब खुद रिंकू सिंह ने अपने 7 पेज के तकनीकी त्यागपत्र में दिए है.
वकीलों के सामने की थी उठक-बैठक-
जुलाई 2025 में शाहजहांपुर के पुवाया में एसडीएम के पद पर तैनात रहे रिंकू सिंह उस समय चर्चा में आए, जब उनका वकीलों के सामने कान पड़कर उठक बैठक लगाते हुए वीडियो वायरल हुआ. सोशल मीडिया पर एक आईएएस अफसर के कान पड़कर उठक बैठक लगाने से किरकिरी हुई तो उन्होंने 30 जुलाई 2025 को राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया गया.
काम नहीं तो सैलरी नहीं-
राजस्व परिषद में करीब 2 महीने तक रिंकू सिंह राही को कोई काम नहीं दिया गया तो उन्होंने 29 सितंबर 2025 को No Work No Pay के सिद्धांत पर सैलरी नहीं लेने की अर्जी अफसरों को भेज दी. रिंकू सिंह ने अपने तकनीकी त्यागपत्र में लिखा है कि उन्होंने राजस्व परिषद में आम जनता के हितों से जुड़े विषयों पर काम करने की कोशिश की. लेकिन NIC के द्वारा प्रोगामर उनको उपलब्ध नहीं कराया गया यानी तमाम कोशिशों के बावजूद रिंकू सिंह राही को काम नहीं करने दिया गया.
रिंकू सिंह ने आईएएस छोड़कर पीसीएस बनने के इस तकनीकी त्यागपत्र में अपनी पहली पोस्टिंग बतौर जिला समाज कल्याण अधिकारी मुजफ्फरनगर का भी जिक्र किया.
रिंकू सिंह को मिली थी जान से मारने की धमकी-
रिंकू सिंह राही जब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की सेवा में जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर मुजफ्फरनगर में तैनात थे तो उन्होंने विभाग में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया. तमाम विद्यालयो में समाज कल्याण विभाग से सरकारी योजना का धन फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कर घोटालेबाज निकाल रहे थे. लाभार्थियों तक सरकारी धन नहीं पहुंच रहा था. किसको किस मद में कितना धन समाज कल्याण विभाग के द्वारा जारी किया गया, इसकी जानकारी देने के लिए रिंकू सिंह राही ने अखबारों में खबरें छपवाना शुरू किया. लोगों को पता चलने लगा कि समाज कल्याण विभाग के द्वारा किसको कहां कितना धन दिया गया. मार्च 2009 में आवंटित बजट में घोटाला नहीं कर पाने और आचार संहिता लागू होने की वजह से ट्रांसफर नहीं हो पाने के कारण घोटालेबाज परेशान हो गए. हालत ऐसे हो गए कि तत्कालीन प्रमुख सचिव समाज कल्याण ने फोन पर धमकी दी कि ईमानदारी नहीं छोड़ी तो गन्ने के खेत में लाश नहीं कंकाल मिलेगा.
बैडमिंटन खेलते समय हुआ था हमला-
इसके बाद 26 मार्च 2009 को उन पर उस समय हमला हो गया, जब वो बैडमिंटन खेल रहे थे. अज्ञात बदमाशों ने 7 गोली मारी, जिसके चलते रिंकू सिंह राही की एक आंख पूरी तरह खराब हो गई. शरीर में स्थायी दिव्यांगता उत्पन्न हो गई.
रिंकू सिंह 2018 में आईएएस के लिए ओवररेज हो गए, तब दिव्यंगता आरक्षण का लाभ लिया. अगर वह चाहते तो पहले ही दिव्यंगता आरक्षण का लाभ लेते और IAS बन गए होते.
16 बार प्रयास के बाद बने थे IAS-
मौजूदा व्यवस्था से खिन्न होते हुए रिंकू सिंह ने अपने त्यागपत्र में लिखा है कि मुजफ्फरनगर में हुए जानलेवा हमले की घटना में मुख्य आरोपी छोड़ दिया गया. किसी को सजा नहीं मिली और उससे भी ज्यादा उस घोटाले की फाइल को भी बिना कार्रवाई के दबा दिया गया. जिसकी वजह से उन पर जानलेवा हमला हुआ. जिला समाज कल्याण अधिकारी रहते रिंकू सिंह को लगा IAS बन जाएंगे तो जनता की बेहतर सेवा कर सकेंगे. जनता के प्रति उनका उत्तरदायित्व बढ़ेगा और यही वजह थी कि आईएएस बनने की जिद पर अड़े रिंकू सिंह लगातार 16 प्रयास के बाद 2023 बैच के आईएएस अफसर बन गए.
IAS से PCS बनना चाहते हैं रिंकू सिंह-
फोन पर बात करते हुए रिंकू सिंह राही ने कहा हमें सैलरी जनता के पैसे से मिलती है. जिस पर किसी का हक नहीं. जब जनता के लिए काम नहीं तो कैसे तनख्वाह ली जा सकती है. कहीं पर भी पोस्ट कर दें पर काम तो लें. जनता का पैसा बिना काम के मिलना उस धन की बर्बादी है. इसीलिए तकनीकी इस्तीफा दिया है. रिंकू सिंह राही ने बताया कि लीन पीरियड में 3 साल में पुरानी सेवा में वापस आ सकते हैं. अक्टूबर 2025 में ही रिंकू सिंह राही ने लीन पीरियड बढ़ाने के लिए पत्र लिखा था और इसी के बाद उन्होंने अब अपने पुराने पद यानी पुरानी सेवा में भेजने का तकनीकी त्यागपत्र भेजा है.
राजनीति में जाने का कोई प्लान नहीं-
उन्होंने साफ कहा कि फिलहाल उनका राजनीति में जाने का कोई प्लान नहीं है. वह तो जनता की सेवा करना चाहते हैं. जनता के हितों के लिए काम करना चाहते हैं. लेकिन उनको ऐसा करने नहीं दिया जा रहा. इसीलिए वह आईएएस छोड़कर अपनी पुरानी सेवा में जाना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने यह अर्जी दी है. अब सरकार को निर्णय लेना है कि वह इसका क्या करें.
(संतोष शर्मा की रिपोर्ट)
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