Delimitation Bill: महिला आरक्षण का समर्थन, परिसीमन का विरोध... सियासी दल क्यों उठा रहे सवाल, कैसे बदलेगा समीकरण?

मोदी सरकार लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के साथ परिसीमन बिल भी ला रही है. मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस महिला आरक्षण का समर्थन कर रही है. लेकिन परिसीमन बिल को घातक बता रही है. परिसीमन को लेकर क्यों विरोध हो रहा है? किन राज्यों को इससे दिक्कत है और उसकी क्या वजह है? समझिए

Lok Sabha
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 16 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:36 PM IST

लोकसभा में तीन बिलों पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है. इसमें केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 (डीलिमिटेशन बिल 2026) शामिल है. सरकार का कहना है कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए ये बाकी 2 बिल भी जरूरी हैं. हालांकि विपक्ष की राय इसको लेकर बंटी हुई है. कांग्रेस महिला आरक्षण बिल का समर्थन कर रही है. लेकिन परिसीमन का विरोध कर रही है. कांग्रेस लीडर गौरव गोगोई ने लोकसभा में कहा कि परिसीमन बिल संविधान, जाति जनगणना और संघीय ढांचे के खिलाफ है.

परिसीमन का विरोध क्यों?
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस परिसीमन विधेयक का विरोध कर रही है. इसके साथ ही डीएमके, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, सीपीआई, यूबीटी, एनसीपी (एसपी), आरजेडी जैसी पार्टियां विरोध कर रही है. 

इस बिल में प्रस्ताव है कि लोकसभा में अधिकतम 850 सीटें होंगी. इसमें 815 राज्यों और 35 केंद्र शासित प्रदेशों से होंगी. अभी अधिकतम संख्या 550 तय की गई है. जबकि लोकसभा में 543 सीटें हैं.

बिल में 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या पर लगी रोक को हटाने का प्रस्ताव है. बिल के मुताबिक डीलिमिटेशन का प्रोसेस ताजा जनगणना के आधार पर होगी. देश में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी. 

विपक्ष का परिसीमन बिल को लेकर विरोध इसलिए है, क्योंकि उनका मानना है कि इससे साउथ के राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है. दक्षिण के राज्यों के सियासी दलों का मानना है कि देश में जनसंख्या बढ़ोतरी असमान रही है. साउथ के राज्यों में जनसंख्या उस अनुपात में नहीं बढ़ी है, जिस अनुपात में उत्तर भारत में बढ़ी है. उनका मानना है कि अगर आबादी के हिसाब से सीटें तय होंगी तो साउथ के राज्यों का प्रतिनिधित्व कम होगा.

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का कहना है कि सरकार डिलिमिटेशन और जेरीमेंडरिंग के जरिए सत्ता हथियाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण के मुद्दे पर पूरी तरह से समर्थन में है.

कैसे बदल जाएगा समीकरण?
महिला आरक्षण बिल पास होने से लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिल जाएगा. लोकसभा में अधिकतम 850 सीटें हो जाएंगी. मसौदे में राज्यवार सटीक आवंटन के बारे में साफ तौर पर कुछ नहीं करा गया है. अगर 50 फीसदी के लिहाज से सीटें बढ़ती हैं तो सभी राज्यों की सीटों में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी. अगर 2011 जनगणना के  मुताबिक संसदीय सीट पुनर्गठन होता है तो उत्तर भारत में सीटों की संख्या बढ़ जाएंगी, क्योंकि इन राज्यों में आबादी तेजी से बढ़ी है. जबकि साउथ के राज्यों में आबादी उतनी तेजी से नहीं है, इसलिए दक्षिण के राज्यों का प्रतिनिधित्व कम होने की आशंका है.

अभी 22.29 लाख लोगों पर एक लोकसभा सीट तय है.  जबकि नए बिल के मुताबिक 14.24 लाख लोगों पर एक सीट बनाने की तैयारी है. उत्तर प्रदेश में 60 से ज्यादा और बिहार में 33 से ज्यादा सीटों की बढ़ोतरी हो सकती है. इससे उत्तर भारत का सियासी दबदबा बढ़ेगा. जबकि साउथ के तमिलनाडु में 1.2 फीसदी सीटें कम हो जाएंगी. इसके साथ ही केरल में भी 1 फीसदी सीट कम हो सकती है.

लोकसभा किसका कितनी प्रतिनिधित्व?
अगर लोकसभा की बात करें तो अभी उत्तर भारत का प्रतिनिधित्व 38.1 फीसदी है. जबकि साउथ का प्रतिनिधित्व 24.3 फीसदी है. पूर्वी राज्यों में अभी 14.4 फीसदी सीटें हैं. पश्चिमी राज्यों में 14.3 फीसदी सीटें हैं. जबकि नए प्रस्तावित बिल में नॉर्थ का प्रतिनिधित्व बढ़कर 43.1 फीसदी हो जाएगा और साउथ का प्रतिनिधित्व घटकर 20.7 फीसदी हो जाएगा. पूर्वी राज्यों में 13.7 फीसदी हो जाएंगी और पश्चिमी राज्यों में 14.4 फीसदी सीटें हो जाएंगी. विपक्षी दलों की इसी की चिंता है.

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