दिल्ली में तापमान कम होने के साथ ही प्रदूषण का खतरा मंडराने लगा है. अधिकतम तापमान अब 35 से 30 डिग्री के बीच है. वहीं न्यूनतम तापमान भी 25 डिग्री से थोड़ा नीचे बने रहने का पूर्वानुमान है. ऐसे में कई सारे फैक्टर अचानक प्रदूषण को बढ़ाने में हिस्सेदारी करने लगेंगे. इसमें पहला, एंटीसाइक्लोनिक सिस्टम के उत्तर-पश्चिम भारत में एक्टिव होने की वजह से ये लगभग तय है कि मॉनसून बस कुछ दिनों का मेहमान है. लेकिन उत्तरप्रदेश में अब भी मानसून एक्टिव है जिसकी वजह से बादल दिल्ली के आसमान पर भी दिख रहे हैं साथ ही आर्द्रता भी काफी अधिक है.
एंटी साइक्लोनिक सिस्टम और मानसूनी सिस्टम मुमकिन है कि आने वाले दिनों में दिल्ली के आसपास टकराएं और उससे गरज के साथ बारिश की संभावना भी बन रही है. सर्दियों की दस्तक यानि शुष्क हवाएं इन सिस्टम के गुजरने के बाद ही ज्यादा हावी होंगी, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है.
कुछ हिस्सों में जलनी शुरू हो चुकी है पराली
इस बीच पंजाब और हरियाणा में जलने वाली पराली से प्रदूषण कब तक शुरु होगा ये सवाल भी लोगों को परेशान कर रहा है. अगर नासा के फायर मैप पर नजर डालें तो उत्तर और उत्तर पश्चिम पंजाब और साथ लगते पाकिस्तान के हिस्सों में फायर स्पॉट अभी से नजर आने लगे हैं. यानि कुछ हिस्सों में पराली जलनी शुरु हो गई है ऐसा दिख रहा है.
कब पहुंचेगा पराली का धुआं दिल्ली में?
हालांकि देखने से पता चलता है कि अभी उस पराली का धुआं दिल्ली या आसपास के इलाकों में अगले कुछ दिनों तक पहुंचेगा इसकी संभावना न के बराबर है. पूर्वानुमान बता रहे हैं कि इस समय हवा की दिशा पूर्व से पश्चिम की ओर और दक्षिण से उत्तर की ओर चल रही है, जो धुएं के आने वाली दिशा से विपरीत है. लेकिन अगले कुछ दिनों में मानसून वापसी के साथ ही हवा की दिशा और रफ्तार बदलेगी और तबतक यानि दशहरे के आसपास धान की फसल कटनी भी शुरु हो जाएगी और तब पराली से आने वाला धुआं दिल्ली को ज्यादा सताएगा.
(कुमार कुनाल की रिपोर्ट)