Advertisement

Yogi Adityanath Cabinet Expansion: ब्राह्मण भी... दलित भी, कौन हैं वो 6 नए चेहरे, जो आज योगी कैबिनेट में होंगे शामिल, विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए सामाजिक और जातीय संतुलन साधने की कोशिश

उत्तर प्रदेश में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. योगी सरकार अभी से फिर विजय पाने के लिए जुट गई है. रविवार दोपहर बाद योगी मंत्रिमंडल का विस्तार होने वाला है. योगी कैबिनेट में इस समय 6 पद खाली हैं और माना जा रहा है कि इन सभी सीटों को भरा जाएगा. खास बात यह है कि इस बार किसी बड़े प्रयोग के बजाय सामाजिक और जातीय संतुलन साधने पर फोकस रखा गया है. 

CM Yogi Adityanath (File Photo: PTI) 
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 10 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:09 PM IST

उत्तर प्रदेश में अगले साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार अपने सबसे बड़े राजनीतिक दांव की तैयारी में जुट गई है. लंबे समय से चर्चा में चल रहे मंत्रिमंडल विस्तार पर आखिरकार मुहर लग गई है और आज रविवार दोपहर लखनऊ के लोकभवन में नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार शाम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात की थी.

योगी कैबिनेट में इस समय छह पद खाली हैं और माना जा रहा है कि इन सभी सीटों को भरा जाएगा. खास बात यह है कि इस बार किसी बड़े प्रयोग के बजाय सामाजिक और जातीय संतुलन साधने पर फोकस रखा गया है. बीजेपी ब्राह्मण, जाट, दलित, पासी, वाल्मीकि, लोधी और अति पिछड़ा वर्ग को साधने की रणनीति पर काम करती दिख रही है. यही वजह है कि जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, वे अलग-अलग सामाजिक समूहों से हैं.
योगी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तस्वीर लगभग साफ होती नजर आ रही है. सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार देर रात सभी संभावित मंत्रियों से मुलाकात कर अंतिम चर्चा कर ली है. योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में कुल 8 मंत्री शपथ ले सकते हैं, जिनमें 6 नए चेहरे होंगे. दो राज्य मंत्रियों का प्रमोशन कर उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है. आपको मालूम हो कि योगी कैबिनेट में वर्तमान में मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सहित कुल 54 मंत्री हैं. राज्य में विधायकों की संख्या को देखते हुए अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं.

सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल 
पश्चिम यूपी से आने वाले सोमेंद्र तोमर को कैबिनेट या स्वतंत्र प्रभार मिल सकता है, जबकि पाल बिरादरी से आने वाले सूचना एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री अजीत पाल का भी कद बढ़ाया जा सकता है. वहीं नए चेहरों में कन्नौज के तिर्वा से विधायक और लोधी समाज के नेता कैलाश राजपूत को मंत्रिमंडल में जगह मिलना तय माना जा रहा है. अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक और वाल्मीकि समाज से आने वाले दलित नेता सुरेंद्र दिलेर भी नए मंत्री के तौर पर शपथ ले सकते हैं.

मनोज पांडेय
रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक मनोज पांडेय का नाम लगभग तय माना जा रहा है. कभी अखिलेश यादव के बेहद करीबी रहे मनोज पांडेय समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सपा से दूरी बनाकर बीजेपी का समर्थन किया और बाद में भगवा खेमे के साथ खुलकर खड़े नजर आए.
मनोज पांडेय ब्राह्मण चेहरे के तौर पर बीजेपी के लिए अहम माने जा रहे हैं. राजनीति विज्ञान में पीएचडी कर चुके मनोज पांडेय का लंबा राजनीतिक अनुभव है. 2012 और 2017 में ऊंचाहार सीट से जीत हासिल कर चुके पांडेय अब बीजेपी के ब्राह्मण समीकरण को मजबूत करने वाले चेहरे के रूप में देखे जा रहे हैं.

भूपेंद्र चौधरी
मुरादाबाद से आने वाले भूपेंद्र सिंह चौधरी बीजेपी के मजबूत संगठनात्मक नेताओं में गिने जाते हैं. आरएसएस से राजनीति की शुरुआत करने वाले भूपेंद्र चौधरी साल 1989 में बीजेपी में शामिल हुए थे. संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां निभाने के बाद वे यूपी बीजेपी अध्यक्ष भी बने. जाट समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. पश्चिमी यूपी में बीजेपी को मजबूत करने में उनकी बड़ी भूमिका रही है. योगी सरकार के पिछले कार्यकाल में वे पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि उन्हें फिर से कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है.

कृष्णा पासवान
फतेहपुर जिले की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान का नाम भी लगभग तय माना जा रहा है. पासी समाज से आने वाली कृष्णा पासवान बीजेपी की पुराने दलित चेहरों में शामिल हैं. उन्होंने कई बार चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की है. 2022 के चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी उम्मीदवार को करीबी मुकाबले में हराया था. बीजेपी दलित वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने के लिए पासी समाज को प्रतिनिधित्व देना चाहती है. इसी रणनीति के तहत कृष्णा पासवान का नाम आगे बढ़ाया गया है.

हंसराज विश्वकर्मा
वाराणसी से एमएलसी और बीजेपी जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा का नाम भी चर्चा में है. विश्वकर्मा समाज पूर्वांचल की अहम अति पिछड़ी बिरादरी मानी जाती है. हंसराज विश्वकर्मा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी नेताओं में भी गिना जाता है. बीजेपी लंबे समय से गैर-यादव OBC वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है. ऐसे में विश्वकर्मा समाज को कैबिनेट में जगह देकर पार्टी पूर्वांचल और अति पिछड़े वर्ग को बड़ा संदेश देना चाहती है.

सुरेंद्र दिलेर
हाथरस से आने वाले सुरेंद्र सिंह दिलेर का नाम वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधि के तौर पर चर्चा में है. उनका राजनीतिक परिवार लंबे समय से सक्रिय रहा है. उनके दादा किशन लाल दिलेर चार बार सांसद रहे, जबकि पिता राजवीर सिंह दिलेर विधायक और सांसद दोनों रहे. सुरेंद्र दिलेर लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं और वाल्मीकि समाज में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. बीजेपी दलित वोट बैंक में वाल्मीकि समुदाय को मजबूत संदेश देना चाहती है.

कैलाश राजपूत
कन्नौज की तिर्वा सीट से विधायक कैलाश राजपूत भी संभावित मंत्रियों की सूची में शामिल हैं. वे लोधी समाज से आते हैं, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली समुदाय माना जाता है. कैलाश राजपूत अलग-अलग दौर में हर बार सत्ता पक्ष के साथ रहे हैं. साल 1996 में बीजेपी, 2007 में बसपा और फिर 2017 में बीजेपी से विधायक बने. इसके बाद फिर से विधायक बने. कन्नौज और आसपास के इलाकों में लोधी वोट बैंक पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है.

(कुमार अभिषेक और समर्थ श्रीवास्तव की रिपोर्ट)

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement