Advertisement

UP Assembly Elections 2027: यूपी चुनाव 2027 में योगी ही होंगे बीजेपी का चेहरा! भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का ये ऐलान अखिलेश यादव के लिए बड़ी चुनौती या सियासी राह होगी आसान?

यूपी में विधानसभा चुनाव अगले साल 2027 में होने वाले हैं. बीजेपी ने साफ कर दिया है कि 2027 चुनाव में योगी आदित्यनाथ ही भाजपा का चेहरा होंगे. इससे नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर विराम लग गया है. सवाल यह है कि यह ऐलान अखिलेश यादव के लिए मौका है या चुनौती? आइए जानते हैं. 

Yogi Adityanath and Akhilesh Yadav (Photo: PTI)
कुमार अभिषेक
  • लखनऊ,
  • 24 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:52 AM IST

यूपी में विधानसभा चुनाव अगले साल 2027 में होने वाले हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही 2027 में बीजेपी का चेहरा होंगे. एक निजी टीवी चैनल के इंटरव्यू में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन नबीन ने ये बात कह दी. नितिन नवीन ने  कहा कि योगी जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश, उत्तम प्रदेश बना, जिसके नतृत्व में एक सशक्त लॉ एंड ऑर्डर यूपी में स्थापित हुआ, वही 2027 का नेतृत्व करेगा. बीजेपी का ये वो ऐलान है जो बीजेपी अपने किसी चेहरे को लेकर अमूमन नहीं करती लेकिन इस ऐलान के बाद कि योगी के चेहरे को ही आगे करके बीजेपी 2027 के चुनाव की अपनी रणनीति साफ कर दी है.

अखिलेश यादव ने जब से PDA की सियासत शुरू की यानी मुस्लिम और यादव समीकरण छोड़कर उन्होंने समग्र ओबीसी की सियासत करनी शुरू की तब से बीजेपी के भीतर का एक धड़ा उत्तर प्रदेश में भी भीतर ही भीतर ओबीसी चेहरे की मांग कर रहा था. लखनऊ से दिल्ली तक इसकी फुसफुसाहट काफी समय से चलती रही. यही वजह है कि यूपी में नेतृत्व परिवर्तन की बात भी पर्दे के पीछे सुनाई देती रही लेकिन पिछले कुछ महीने से पार्टी के भीतर की ये मुहिम ठंडी पड़ने लगी थी. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बयान ने यूपी के नेतृत्व को लेकर अपनी मुहर लगा दी है. बीजेपी के भीतर और बाहर अब नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा खत्म हो जाएगी और सीएम योगी के नतृत्व में चुनाव की पूरी तैयारी दिखाई देगी.

अखिलेश यादव को लगेगा धक्का या सियासी राह होगी आसान
अब सबसे बड़ा सवाल यह की क्या योगी का चेहरा आगे करना अखिलेश यादव के लिए मुफीद होगा या फिर मुसीबत बनेगा? बीजेपी का एक धड़ा 2024 लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी की करारी हार के बाद 2027 में अखिलेश के सामने ओबीसी चेहरा लाने की बात कर रहा था. अखिलेश यादव के नजदीकी लोग भी सार्वजनिक तौर पर यह कहने लगे थे कि अगर योगी ही चेहरा रहे तो अखिलेश यादव के लिए 2027 का चुनाव आसान हो जाएगा क्योंकि तब 2027 का चुनाव अगड़ा बनाम पिछड़ा बन सकता है. 

अखिलेश यादव अब समाजवाद का उतना नाम नहीं लेते जितना PDA का जिक्र करते हैं. वजह उन्हें लगता है वो पूरे OBC का चेहरा होंगे और खासकर अगर सामने सीएम योगी हैं तो उनकी स्वीकार्यता यादव चेहरे से ज्यादा OBC चेहरे की हो सकती. यही नहीं हाल के महीनो में ब्राह्मणों को लेकर भी उत्तर प्रदेश में एक विमर्श तेजी से उभरा है कि ब्राह्मण योगी सरकार से नाराज हैं. ब्राह्मणों की अलग बैठक और उसे पर पार्टी की तरफ से आई चेतावनी जैसी बातों से यह लगने लगा था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ब्राह्मणों की नाराजगी पर भी घेरा जा रहा है. एक तरफ ओबीसी दूसरी तरफ ब्राह्मणों का विमर्श लेकिन आरएसएस के हस्तक्षेप और केंद्रीय नेतृत्व के योगी में भरोसा जताने के बाद यह साफ हो गया था कि चुनाव के बाद पहले ही ऐसे तमाम कयासों पर विराम लगाना जरूरी है. राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का ताजा बयान ये दिखता है यूपी की लड़ाई के पहले सभी संशय पार्टी दूर कर देना चाहती है.

सीएम योगी का पलड़ा भारी 
पूरा विपक्ष योगी को ठाकुर बताने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा, उनके पुराने नाम अजय सिंह बिष्ट बोलने में भी परहेज नहीं कर रहा था ताकि ये चुनाव अगड़ा बनाम पिछड़ा किया जा सके लेकिन सीएम योगी भगवाधारी होना, लॉ एंड ऑर्डर पर उनका दबंग स्टैंड और उनपर भ्रष्टाचार का लेस मात्र भी आरोप न लगना उन्हें बीजेपी का सबसे बड़ा और  दमदार चेहरा बनाता है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे उत्तर प्रदेश को एक्सप्रेस वे प्रदेश में तब्दील कर दिया है. बीजेपी सरकार इसे बड़े स्तर पर शो केस कर रही है, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं पर होने वाली घटनाओं पर योगी सरकार का 0 टॉलरेंस और मजबूत लव एंड ऑर्डर का विमर्श सीएम योगी का पलड़ा भारी कर देता है. 

पश्चिम में लॉ एंड ऑर्डर बड़ा मुद्दा है तो पूर्वांचल में जाति की राजनीति हावी होती है. पूर्वांचल में सपा-कांग्रेस और दूसरी छोटी जगह को जोड़कर बेहद मजबूत स्थिति में है तो पश्चिम में बीजेपी जयंत चौधरी को जोड़कर मजबूत दिखती है. ऐसे में अगड़ा बनाम पिछड़े का विमर्श ना बने भाजपा इसकी पूरी कोशिश करेगी. अवध से लेकर प्रयागराज और बुंदेलखंड तक बीजेपी की सबसे बड़ी कोशिश उसे ओबीसी और दलित वोटर को वापस लाने की है जो 2024 में उससे खिसक गया था. ब्राह्मणों की नाराजगी भी जल्दी दूर हो ये भी बीजेपी के लिए चुनौती होगी.

नेतृत्व पर सस्पेंस खत्म
नेतृत्व पर सस्पेंस खत्म होने के बाद बीजेपी जल्दी ही मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन का ऐलान करने जा रही है. इसके जरिए वह नाराज जातियों और तबकों को साधने की कोशिश कर रही है. उधर अखिलेश यादव लगातार गैर यादव ओबीसी चेहरों को अपने पार्टी संगठन में तरजीह दे रहे हैं. वह पार्टी को उस फार्मूले पर आगे ले जा रहे हैं, जिसमें सामान्य सीटों पर भी दलितों को लड़ाकर PDA को टिकट में प्रतिनिधित्व दे सकें. अखिलेश यादव को मालूम है कि हिंदुत्व के पिच पर वह योगी से नहीं टकरा सकते. उन्हें योगी को जाति की पिच पर खींच कर लाना ही होगा लेकिन योगी को भी अपनी USP मालूम है. योगी ल लॉ एंड ऑर्डर महिला सम्मान, साफ सुथरी और पारदर्शी भर्ती और सुरक्षित और विकसित यूपी का विमर्श का ही चेहरा रहने की कोशिश करेंगे.


 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement