एशिया की सबसे लंबी ऑलवेदर सुरंग जोजिला टनल पर तेजी से काम चल रहा है. ये सुरंग जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को साल भर जोड़े रखेगी. यह सुरंग श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग-1 पर है और साल 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है. फिलहाल कश्मीर की ओर का निर्माण पूरा हो चुका है. यह सुरंग -45°C तक की ठंड में भी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगी.
इस परियोजना का मकसद लद्दाख को देश और दुनिया से जोड़ना है, जिससे सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण होने वाली कनेक्टिविटी की समस्या खत्म हो जाएगी. सुरंग के पूरा होने पर श्रीनगर और लेह के बीच यात्रा का समय 10 घंटे से घटकर 7 घंटे हो जाएगा.
सरहद पर पहुंच होगी आसान-
जोजिला टनल सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है. यह भारतीय सेना को चीन और पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमाओं पर रसद और सैनिकों की आवाजाही में मदद करेगी. इसके अलावा, यह सुरंग लद्दाख और कश्मीर घाटी में पर्यटन को बढ़ावा देगी. स्थानीय लोगों के लिए यह सुरंग जीवन को आसान बनाएगी, क्योंकि अब उन्हें सर्दियों के लिए महीनों पहले तैयारी करने की आवश्यकता नहीं होगी.
सोनमर्ग को लद्दाख से जोड़ने वाली जेड मोड़ टनल-
जोजिला टनल के साथ-साथ जेड मोड़ टनल भी तैयार की जा रही है. यह सुरंग सोनमर्ग को लद्दाख से जोड़ने के लिए बनाई जा रही है. 6.5 किमी लंबी इस सुरंग में 10 मीटर चौड़ी सड़कें और एक एस्केप टनल भी बनाई गई है. जेड मोड़ टनल सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है और इससे हर घंटे 1000 से अधिक वाहन गुजर सकेंगे.
माइन्स 50 डिग्री में भारतीय सेना की मुस्तैदी-
दुनिया का दूसरा सबसे ठंडा रिहायशी इलाका द्रास भारतीय सेना के जवानों की हिम्मत और जज्बे का गवाह है. -50°C तक की ठंड में भी जवान देश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं. योग और विशेष ट्रेनिंग के जरिए वे खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखते हैं. द्रास में तैनात जवानों की जिम्मेदारी न केवल मौसम की चुनौतियों का सामना करना है, बल्कि चीन और पाकिस्तान की गतिविधियों पर भी नजर बनाए रखना है. यह क्षेत्र सामरिक रूप से भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
जोजिला और जेड मोड़ सुरंगें न केवल कनेक्टिविटी को सुधारेंगी, बल्कि क्षेत्र में विकास और खुशहाली भी लाएंगी. इन सुरंगों के पूरा होने पर लद्दाख और कश्मीर घाटी में पर्यटन को नई ऊंचाई मिलेगी. इसके साथ ही सेना और आम जनता के लिए यह सुरंगें वरदान साबित होंगी.
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