गणपति उत्सव का तीसरा दिन देशभर में भक्ति और आस्था के अनोखे रंग बिखेर रहा है. सूरत में इस अवसर पर 80,000 से अधिक गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं. यहां के कुछ युवकों ने तापी नदी में तैरता हुआ एक विशेष पंडाल बनाया है. यह पंडाल 500 किलो तक का वजन उठा सकने वाली फाइबर फ्लोटिंग शीट पर लाइट हाउस थीम पर आधारित है. आयोजकों का कहना है कि 2006 में सूरत में आई भीषण बाढ़ के बाद से वे तापी नदी में गणपति की स्थापना कर रहे हैं, ताकि ऐसी संकट फिर कभी न आए. राजकोट में एक मिठाई दुकानदार ने मोदक की 50 से 60 किस्में बनाई हैं, जिसमें 12,000 रुपये प्रति किलो बिकने वाला गोल्ड मोदक विशेष आकर्षण का केंद्र है. इसमें 24 कैरेट गोल्ड वर्क और मामरो बादाम का उपयोग किया गया है. ओडिशा में धान के भूसे से गणपति की कलाकृतियां तैयार की जा रही हैं, जो 'लोकल फॉर वोकल' पहल का उदाहरण बन रही हैं. इन कलाकृतियों को बनाने में अच्छी गुणवत्ता वाले भूसे का चयन, सफाई, सुखाने, प्राकृतिक रंगों और कुशल कारीगरी का उपयोग होता है.