सोशल अड्डा ने बच्चों की पढ़ाई लिखाई से जुड़े एक सर्वे पर बात की. सरकार द्वारा कराए गए कॉम्प्रिहेंसिव मॉड्यूल सर्वे में देशभर में बच्चों की शिक्षा से जुड़ी जानकारी सामने आई है. नेशनल सैंपल सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग तैंतीस फीसदी छात्र प्राइवेट कोचिंग लेते हैं, जिसे शैडो स्कूलिंग कहा जाता है. यह देश में शहरी और ग्रामीण शिक्षा के बीच गहरी खाई का संकेत है. ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों का दबदबा है, जबकि शहरी इलाकों में ज्यादातर बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं और निजी कोचिंग भी लेते हैं. रिपोर्ट बताती है कि देश में 95 फीसदी छात्रों की शिक्षा का खर्च परिवार ही उठाते हैं. एक व्यक्ति ने कहा, "मुझे लगता है की एजुकेशन जो है. बच्चों को स्कूल में जितनी एजुकेशन मिलनी चाहिए वो सुफ्फिसिएंट है और अडिशनल कोचिंग क्लास में डाल के आई थिंक बच्चे पे बहुत ज्यादा हम प्रेशर डाल रहे है" शैडो स्कूलिंग राष्ट्रीय शिक्षा नीति के समान और किफायती शिक्षा के लक्ष्य को चुनौती देती नजर आ रही है.