प्रयागराज के माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को औपचारिक नोटिस जारी कर 24 घंटे में स्पष्टीकरण मांगा है कि वे अपने शिविर के बोर्ड पर 'शंकराचार्य' शब्द का प्रयोग किस आधार पर कर रहे हैं. नोटिस में वर्ष 2022 की सुप्रीम कोर्ट में लंबित सिविल अपील का हवाला देते हुए कहा गया है कि ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में स्वयं को प्रदर्शित करना न्यायालय की अवहेलना हो सकती है. विवाद की शुरुआत मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान पालकी ले जाने को लेकर हुई, जहां संतों ने पुलिस पर बदसलूकी और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं. स्वामी के समर्थकों का तर्क है कि पट्टाभिषेक विधि-विधान से हुआ है और प्रशासन का नोटिस असंवैधानिक है. इस घटना के विरोध में संतों ने 10-11 मार्च को दिल्ली में बड़े जमावड़े का आह्वान किया है. यह पूरा मामला शंकराचार्य पद की वैधता, सनातन परंपराओं और प्रशासनिक प्रोटोकॉल के इर्द-गिर्द केंद्रित है.