बिहार के बेगूसराय से एक दर्दनाक खबर सामने आई है. युवक की लाश उसके गांव पहुंची तो कोहराम मच गया. इस गांव का रहने वाला एक शख्स हरियाणा के गुरुग्राम में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था. लेकिन सीनियर के तानों से तंग आकर खुदकुशी कर ली. युवक के पास से 8 पन्नों का सुसाइड नोट मिला है. उसमें युवक ने सुपरवाइजर पर शारीरिक शोषण और ताने मारने का आरोप लगाया है. सुसाइड नोट के मुताबिक सुपरवाइजर युवक से बोलता था कि अपनी पत्नी को बिहार से लाओ.
गुरुग्राम में रहने वाले बेगूसराय के रामपुकार यादव ने सुसाइड नोट को अपने भाई और भांजा के व्हाट्सअप पर भेजा. इसके 15 मिनट बाद उसने गुरुग्राम में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली.
'80 हजार में मिलती है बिहारन, वाइफ के लाओ'-
रामपुकार यादव ने सुसाइड नोट में अपने सुपरवाइजर देवेंद्र कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उसने लिखा कि सुपरवाइजर बोलता था कि 80 हजार में बिहारन मिलती है. हरियाणा में तो भैंस भी 1.3 लाख में बिकती है. बिहार से अपनी पत्नी को लाओ. वो धमकी भी देता था कि किसी को बताओगे तो हाथ-पैर तुड़वा दूंगा. बार-बार बिहारी कहकर जलील करता था. उसने लिखा कि ब्लैकमेल और जलील करने से परेशान होकर मैं सुसाइड कर रहा हूं. इसका जिम्मेदार सुपरवाइजर देवेंद्र कुमार है.
8 पेज का सुसाइड नोट-
सूसाइड नोट में रामपुकार ने लिखा है कि TUV SUD South asia Pvt Ltd का सुपरवाइजर देवेंद्र मुझे 3 साल से बहुत परेशान कर रहा है. मैं उसके साथ एक ही रुम में रहता था. मैं शराब नहीं पीता था, एक दिन उसने मुझे कोल्ड ड्रिंक मे शराब मिलाकर पिला दिया और नशा में आने पर मेरे साथ गलत काम किया. दूसरे दिन कहने पर हमने विरोध किया तो ब्लैकमेल किया. फरवरी 2022 से 2023 जुलाई तक यह चला.
रामपुकार ने लिखा कि वो लगातार पैसे मांगता था और वापस भी नहीं करता था. उसने लिखा कि देवेंद्र एक लड़की के साथ रहता था. लेकिन जब वो भाग गई तो उसने बोला कि मेरे लिए लड़की की व्यवस्था करो. मैंने मना कर दिया और मैनेजर से डिपार्टमेंट चेंज करने को कहा. लेकिन मैनेजर नें चेंज नहीं किया.
मैनेजर से लेकर HR तक गया- सुसाइड नोट
सुसाइड नोट में रामपुकार ने लिखा कि उसने परेशान होकर मैंने इसकी शिकायत एडमिन पंकज मिश्रा से की. लेकिन उसने मैनेजर से बात करने को कहा. लेकिन कुछ नहीं हुआ. मैं एचआर के पास गया. लेकिन उन्होंने कहा कि तुम मैनेजर से बात करके मामला खत्म करो. लेकिन कुछ नहीं हुआ.
तानों से तंग आकर 30 साल के शख्स ने की खुदकुशी-
रामपुकार 30 साल का था. वो गुरुग्राम की सेक्टर-20 में उद्योग विहार फेज-II में स्थित TUV SUD South asia Pvt Ltd में काम करता था और वहीं रहता था. वो साल 2022 से नौकरी कर रहा था. जबकि पत्नी एक बच्चे के साथ गांव में परिवार के साथ रहती थी. आत्महत्या के बाद लाश आते ही गांव में कोहराम मचा हुआ है. रामपुकार ने 17 मई को खुदकुशी कर ली थी.
पुलिस पर भी उठे सवाल-
जब इसकी जानकारी गुरुग्राम, नोएडा और दिल्ली में रहने वाले उसके रिश्तेदार और परिजन को हुई तो वो मौके पर पहुंचे और पुलिस को बुलाया. लेकिन सोमवार की शाम तक FIR नहीं हो सका तो परिजन लाश लेकर गांव आ गए. घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग बड़ी संख्या में मौके पर जुट गये और पूरे गांव में मातमी माहौल है. पत्नी रुबी देवी सहित परिजन लगातार रो-रोकर बेसुध हो रहे हैं.
मृतक के रिश्तेदार विनोद ने बताया कि मरने से पहले अपने बड़े भाई को व्हाट्सएप पर सुसाइड नोट भेजा था. उन्होंने फोन किया तो फोन रिसीव नहीं किया. फिर उन्होंने एक लड़के को फोन किया तो पता चला कि गेट बंद है. बड़े भाई के कहने पर गेट तोड़ा गया तो वह पंखा से लटका हुआ था. पुलिस ने लाश उतारा और जांच करके थाना ले गई. वहां कहा गया कि आज संडे है, पोस्टमार्टम नहीं हो पाएगा.
फिर लाश को दीनदयाल उपाध्याय हॉस्पिटल हरीनगर में रख दिया गया और कहा कि सोमवार को 10:00 बजे पोस्टमार्टम होगा. सोमवार की सुबह में वहां पहुंचे तो 11:00 बजे तक कोई नहीं आया, आईओ ने फोन पर कहा की प्रक्रिया शुरू होगा? पोस्टमार्टम होने के बाद FIR करने के लिए कहा तो कहा कि अंतिम संस्कार कीजिए और बड़े भाई पंकज कुमार को छोड़ दीजिए. हम लोग तैयार नहीं हुए.
पुलिस पर पीड़ित परिवार के आरोप-
उन्होंने कहा कि FIR में 6 घंटा लगेगा। हम लोग बगैर FIR के लाश ले जाने के लिए तैयार नहीं हुए तो थाना पर ले गए. मृतक के बड़े भाई पंकज को कहने लगे कि पहले से सभी जानकारी होने की बात कहना होगा, हम लोगों ने विरोध किया और कहा कि सुसाइड नोट के आधार पर केस कीजिए. उन्होंने देवेंद्र द्वारा लिए गए पांच लाख रुपया की चर्चा नहीं करने और बिहारी शब्द हटाने की बात कहने पर ही FIR करने की बात कहा था.
हम लोग तैयार इसके लिए तैयार नहीं हुए तो उन्होंने FIR नहीं लिया. सोमवार की शाम में 6:45 बजे तक हम लोग थाना पर रहे. लेकिन हमारी बात सुनने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ. इधर लाश की स्थिति बिगड़ने लगी थी. घटना के 30 घंटा के बाद भी FIR नहीं लिया गया. उसके बाद हम लोग मजबूरी में लाश को लेकर गांव आ गए. न्याय मिलने की सभी आशा तत्काल समाप्त हो गई है.
(सौरभ कुमार की रिपोर्ट)
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