उत्तर प्रदेश के बदायूं में अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड के जरिए निवेशकों से करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे कंपनी के दो निदेशकों को आखिरकार STF ने गिरफ्तार कर लिया. एसटीएफ नोएडा यूनिट और थाना कोतवाली बदायूं की संयुक्त टीम ने शशिकांत मौर्य और सूर्यकांत मौर्य को गिरफ्तार किया है. दोनों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था.
बदायूं में दर्ज मुकदमे में थे वांछित-
बदायूं कोतवाली में दर्ज मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 316(2), 338, 336(3), 340(2), 352 और 351(2) के तहत कार्रवाई की गई है. इनमें मुख्य रूप से धोखाधड़ी, संपत्ति से जुड़ी आपराधिक हेराफेरी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं.
पुलिस के मुताबिक, 1 जुलाई 2025 को डीआईजी बरेली परिक्षेत्र ने दोनों आरोपियों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था. इसके बाद भी दोनों लंबे समय तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहे.
निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी का आरोप-
अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड के जरिए लोगों से निवेश के नाम पर रकम जमा कराने और बाद में रकम वापस न करने के आरोप में बदायूं समेत कई जिलों में मामले दर्ज हुए. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, बदायूं, बरेली और पीलीभीत समेत कई जिलों में निवेशकों से 500 करोड़ रुपये से अधिक की रकम हड़पने का आरोप शशिकांत और सूर्यकांत समेत कंपनी से जुड़े लोगों पर लगा है.
बदायूं में इस मामले से करीब 15 हजार निवेशकों के प्रभावित होने की रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है.
कई मुकदमों के बाद STF की एंट्री-
एसएसपी बदायूं अंकिता शर्मा ने बताया कि थे दोनों भाइयों के खिलाफ बदायूं और बरेली में कई मुकदमे दर्ज हुए थे. गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों ने न्यायालय का रुख भी किया था. अप्रैल 2026 में हाईकोर्ट द्वारा गिरफ्तारी पर लगी रोक हटाए जाने के बाद दोनों की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हुआ था.
अब 7 सितंबर 2026 को STF नोएडा यूनिट और बदायूं कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया. दोनों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
500 करोड़ के आरोप वाले मामले में बड़ी गिरफ्तारी-
अमर ज्योति प्रकरण में लंबे समय से निवेशक अपनी रकम वापस दिलाने और मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे. अब शशिकांत और सूर्यकांत की गिरफ्तारी को मामले में बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है.
पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब निवेशकों की रकम की वापसी और आरोपियों की संपत्तियों से वसूली का मुद्दा भी इस मामले में प्रमुख बना हुआ है.
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