मजदूर के पास आया 7 करोड़ का नोटिस, 6 साल पहले की गलती बन गई मुसीबत

उत्तर प्रदेश के हरदोई में एक मजदूर के पास आयकर विभाग का 7 करोड़ का नोटिस आया है. मजदूरी से घर चलाने वाला ये परिवार नोटिस से सदमे में है. इस शख्स के घर में खाने के लिए महीने भर का अनाज नहीं है, लेकिन आयकर विभाग की करोड़ों की देनदारी हो गई.

Hardoi News
gnttv.com
  • हरदोई,
  • 19 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:39 PM IST

उत्तर प्रदेश के हरदोई में एक शख्स के घर में खाने तक का अनाज नहीं है. लेकिन सरकारी कागजों में वो करोड़पति है. जो भी ये वाक्या सुनता है, वो हैरान रह जाता है. मजदूरी करके पेट पालने वाले इस शख्स को आयकर विभाग ने 7 करोड़ का नोटिस भेजा है. जब उसके पास नोटिस आया तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. फिलहाल गरीब मजदूर इंसाफ के लिए अधिकारियों से गुहार लगाने जा रहा है.

मजदूर को मिला 7 करोड़ का नोटिस-
हरदोई जिले के माधौगंज थाना क्षेत्र के रुदामऊ गांव के एक शख्स पर सरकारी मुसीबत टूट पड़ी है. मजदूरी करने वाले गोविंद कुमार को आयकर विभाग ने 7 करोड़ 15 लाख 92 हजार 786 रुपये का नोटिस थमा दिया. इस शख्स के घर में खाने के लिए महीने भर का अनाज नहीं है, लेकिन आयकर विभाग की करोड़ों की देनदारी हो गई. नोटिस मिलने के बाद से परिवार सदमे में है.

मजदूर के पास क्यों आया नोटिस?
इस कहानी की जड़ें करीब छह साल पुरानी हैं. जब काम की तलाश में गोविंद कानपुर गया था. वहीं, गरीबी का फायदा उठाकर उसे सरकारी मदद दिलाने का झांसा दिया गया. एक महिला उसे सीतापुर के बिसवां ले गई, जहां एचडीएफसी बैंक में उसके नाम से खाता खुलवाया गया. बदले में गोविंद को मिले सिर्फ दो-तीन हजार रुपये. लेकिन उससे उसकी पासबुक और चेकबुक ले ली गई. 

आशंका है कि इसी खाते के जरिये जालसाजों ने फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों का लेन-देन किया और गरीब मजदूर को मोहरा बना दिया. जब आयकर विभाग की टीम गांव पहुंची और पुराने नोटिस व बैंक ट्रांजेक्शन की जानकारी दी, तो गोविंद के होश उड़ गए.

बड़ा भाई लगाता है ठेका-
गोविंद का बड़ा भाई कस्बे में ठेला लगाता है. छोटा भाई मजदूरी करता है. फिलहाल अब गोविन्द पूरे मामले में खुद को बेगुनाह साबित करने और दोषी लोगों पर कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों के पास गुहार लगाने की तैयारी में है. लेकिन सवाल यह है इतने बड़े ट्रांजेक्शन पर बैंक की निगरानी कहां थी? और उन जालसाजों पर कार्रवाई क्या होगी? जिन्होंने एक गरीब की मजबूरी को हथियार बना लिया?

(प्रशांत पाठक की रिपोर्ट)

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