5 करोड़ की जमीन, सरकारी नौकरी और दो मकानों के लिए बेटी बनी मां की दुश्मन... एक्सीडेंट नहीं, 7 लाख की सुपारी देकर रची गई मर्डर की साजिश

करीब एक साल पहले लोअर कोर्ट में एलडीसी रहे विजय वशिष्ठ उर्फ विजय शर्मा का निधन हो गया. परिवार में पत्नी नीरज, 24 वर्षीय बेटी आयुषी और मानसिक रूप से दिव्यांग 16 वर्षीय बेटा था. पिता की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति का मौका आया तो आयुषी खुद नौकरी करना चाहती थी.

Jaipur murder
शरत कुमार
  • जयपुर,
  • 09 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:48 AM IST

जयपुर की एयरपोर्ट कॉलोनी में रहने वाली 50 वर्षीय नीरज शर्मा की मौत को पहले सड़क हादसा माना गया, लेकिन पुलिस की जांच ने ऐसी साजिश का खुलासा किया जिसने हर किसी को हैरान कर दिया. इस मर्डर मिस्ट्री के केंद्र में थी नीरज की 24 वर्षीय बेटी आयुषी शर्मा, जिसने सरकारी नौकरी, करोड़ों की संपत्ति और दोनों मकानों पर कब्जे के लिए अपनी ही मां की हत्या की पूरी पटकथा लिख डाली. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूछताछ में आयुषी को अपने किए पर जरा भी पछतावा नहीं दिखा.

पिता की मौत के बाद शुरू हुई लालच की कहानी
करीब एक साल पहले लोअर कोर्ट में एलडीसी रहे विजय वशिष्ठ उर्फ विजय शर्मा का निधन हो गया. परिवार में पत्नी नीरज, 24 वर्षीय बेटी आयुषी और मानसिक रूप से दिव्यांग 16 वर्षीय बेटा था. पिता की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति का मौका आया तो आयुषी खुद नौकरी करना चाहती थी. शुरुआत में मां तैयार भी हो गई, लेकिन नीरज के भाई ने समझाया कि दिव्यांग बेटे की देखभाल और परिवार की जिम्मेदारी को देखते हुए नौकरी नीरज को करनी चाहिए. इसके बाद नीरज ने पति की जगह सरकारी नौकरी जॉइन कर ली. यही फैसला आयुषी के मन में मां के प्रति नफरत की वजह बन गया.

5 करोड़ की जमीन का लालच देकर तैयार किए साथी
पुलिस जांच के मुताबिक, आयुषी पुराने घर में रहने लगी और एलएलबी की पढ़ाई के दौरान अपने चचेरे भाई बलराम के साथ रहने लगी. वहीं उसने मां की हत्या का प्लान बनाया. उसने बलराम से कहा कि अगर वह मदद करेगा तो आगरा रोड की करीब 5 करोड़ रुपये की पांच बीघा जमीन और भरतपुर की करीब 5 करोड़ रुपये की चार बीघा जमीन उसके नाम कर दी जाएगी. मां के मरने के बाद सरकारी नौकरी और जयपुर के दोनों मकानों पर भी उसका कब्जा हो जाएगा.

पहली कोशिश नाकाम, फिर टोने-टोटके का सहारा
साजिश की जानकारी ताऊ मोहन शर्मा तक पहुंची. भरतपुर के हेमंत शर्मा से संपर्क किया गया. एक महीने पहले थार से नीरज को कुचलने की कोशिश हुई, लेकिन वह बच गईं. इसके बाद आयुषी ने मां को घर से बाहर निकालने के लिए नींबू, लाल रंग और कथित टोने-टोटके जैसी हरकतें शुरू कर दीं. खतरे का अंदेशा होने पर नीरज ने घर में जाली लगवाई और चार सीसीटीवी कैमरे भी लगवा दिए.

7 लाख की सुपारी, किराए की स्कॉर्पियो से रची साजिश
हत्या की जल्दबाजी में दोबारा प्लान बनाया गया. हेमंत ने 7 लाख रुपये में हत्या कराने की हामी भरी. हरियाणा नंबर की स्कॉर्पियो किराए पर ली गई. आकाश और अरविंद को वाहन से कुचलने, जबकि रोहित और मोहित को रेकी की जिम्मेदारी दी गई.

4 जुलाई को नीरज अपने दिव्यांग बेटे को फिजियोथेरेपी कराकर लौट रही थीं. इसी दौरान आयुषी ने उन्हें जरूरी काम बताकर घर बुलाया. रास्ते में पहले से मौजूद रेकी कर रहे युवकों ने इशारा किया और स्कॉर्पियो ने 100 किमी प्रति घंटे से ज्यादा रफ्तार में सड़क किनारे चल रही नीरज को जोरदार टक्कर मार दी. वह करीब 100 मीटर दूर जाकर गिरीं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई.

CCTV ने खोल दी पूरी साजिश
मां की मौत के बाद आयुषी ने मामा को रोते हुए हादसे की सूचना दी, लेकिन उसके हावभाव ने मामा को शक में डाल दिया. उन्होंने पुलिस से सिर्फ दुर्घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की. सीसीटीवी फुटेज में नीरज सड़क के बिल्कुल किनारे चलती दिखीं, जबकि पूरी सड़क खाली थी. दूसरी फुटेज में पहले से खड़ी स्कॉर्पियो, रेकी करते युवक और हादसे के बाद उनका बिना रुके भाग जाना नजर आया. पुलिस ने क्षतिग्रस्त स्कॉर्पियो बरामद की. वाहन मालिक से पूछताछ करते-करते जांच हेमंत, फिर मोहन शर्मा और आखिरकार आयुषी तक पहुंच गई.

भरतपुर के रूपवास गांव से आयुषी को हिरासत में लेकर जयपुर लाया गया. आरोपियों के आमने-सामने बैठाने पर उसने पूरी साजिश कबूल कर ली. पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान भी आयुषी के चेहरे पर किसी तरह का पछतावा नहीं था. उल्टा वह पुलिस को बेपरवाही से जवाब देती रही.

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