उत्तर प्रदेश में बहराइच के कतरनियाघाट के जंगलों से रेस्क्यू की गई देश की चर्चित मोगली गर्ल(एहसास) अब हमारे बीच नहीं रही. 18 साल की एहसास ने राजधानी लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में इलाज के दौरान 15 जून को आखिरी सांस ली. डॉक्टरों के मुताबिक, उसकी मौत की वजह फेफड़ों की बीमारी के चलते हुआ सेप्टिसीमिया (खून में भयंकर संक्रमण) है.
कई दिनों से खराब थी तबीयत-
एहसास की तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब चल रही थी. उसे लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां सुधार होने पर 11 जून को डिस्चार्ज कर दिया गया. लेकिन 15 जून को अचानक उसकी हालत फिर बिगड़ गई. उसे दोबारा अस्पताल ले जाया गया, जहां पहुंचने के कुछ ही देर बाद उसने दम तोड़ दिया. पुलिस ने अस्पताल के डेथ मेमो के आधार पर पंचनामे की कार्रवाई पूरी कर ली थी.
सड़क पर भटके हुए मिली थी एहसास-
एहसास पहली बार जनवरी 2017 में सुर्खियों में आई थी, जब उसे बहराइच के मोतीपुर रेंज में एक सड़क पर भटकते हुए देखा गया था. उस वक्त वह इंसानी समाज से पूरी तरह कटी हुई थी. उसका व्यवहार किसी जंगली जानवर जैसा था, वह चारों हाथ-पैर के बल चलती थी, कपड़े पहनने से साफ इनकार कर देती थी और इंसानों को देखकर चीखने-चिल्लाने लगती थी. बहराइच की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने शुरुआत में उसका नाम पूजा रखा था.
सालों की देखभाल के बाद आया बदलाव-
रेस्क्यू के बाद उसे लखनऊ के मोहान रोड स्थित निर्वाण राजकीय बाल गृह विशेषीकृत लाया गया, जहां उसका नाम बदलकर एहसास रखा गया. डॉक्टरों की जांच में सामने आया था कि उसका दिमाग पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया था, जिसके चलते वह मानसिक दिव्यांगता और मिर्गी के दौरों से जूझ रही थी. हालांकि, सालों की देखभाल और थेरेपी के बाद उसमें काफी बदलाव आया था. उसने कपड़े पहनना और केयरटेकर्स को पहचानना सीख लिया था. निर्वाण होम की केयरटेकर के साथ एहसास का सबसे गहरा रिश्ता था. एहसास के जाने से टूट चुकीं रानी ने रुंधे गले से कहा, वह मुझे प्यार से अम्मा बुलाती थी. मुझे हमेशा उम्मीद थी कि वह एक दिन पूरी तरह ठीक हो जाएगी, लेकिन अब सिर्फ उसकी यादें ही हमारे पास बची हैं.
(अंकित मिश्रा की रिपोर्ट)
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