Advertisement

ऑफबीट

लाख से बनता है, फूटते ही बिखरता है रंग, जानिए जयपुर के गुलाल गोटे की कहानी

रिदम जैन
  • जयपुर,
  • 03 मार्च 2026,
  • Updated 9:29 AM IST
1/6

होली आते ही जयपुर के परकोटे में रंगों की खुशबू घुलने लगती है. बाजारों में भीड़ है, दुकानों पर रंगों के ढेर सजे हैं, लेकिन इन सबके बीच एक खास तैयारी चुपचाप चल रही होती है 'गुलाल गोटा' की. यह वही पारंपरिक रंगीन गोला है, जिससे कभी राजा-महाराजाओं की होली खेली जाती थी. आज भी जयपुर में शाही अंदाज की होली की बात हो और गुलाल गोटे का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता.

2/6

परकोटे के मनिहारों के रास्ते में इन दिनों कारीगर परिवारों के यहां लगातार काम चल रहा है. खास बात यह है कि मुस्लिम कारीगरों के परिवार पिछले नौ पीढ़ियों से इस कला को संभाले हुए हैं. समय बदला, बाजार बदले, लेकिन गुलाल गोटा बनाने की पारंपरिक प्रक्रिया आज भी लगभग वैसी ही है जैसी पहले हुआ करती थी.

3/6

कारीगर शमशेर मोहम्मद बताते हैं कि गुलाल गोटा प्राकृतिक लाख से तैयार किया जाता है. पहले 2 से 3 ग्राम लाख को सिगड़ी में पिघलाया जाता है. फिर उसे फूंकनी में लगाकर गोल घुमाते हुए उसमें हवा भरी जाती है. धीरे-धीरे वह गुब्बारे जैसा आकार ले लेता है. इसके बाद उसे पानी में ठंडा किया जाता है, ताकि उसका आकार मजबूत हो जाए.

4/6

जब यह पतला खोखला गोला तैयार हो जाता है, तब उसमें प्राकृतिक और सुगंधित गुलाल भरा जाता है. यह गुलाल अरारोट से बनाया जाता है और पूरी तरह हर्बल होता है. रंग भरने के बाद गोटे को पतली कागजी परत से सील कर पैक किया जाता है. तैयार गोटा हल्का होता है और जैसे ही किसी पर फेंका जाता है, वह फूटकर रंगों की बौछार कर देता है. यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है.

5/6

जयपुर में बने गुलाल गोटों की डिमांड सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है. हर साल इनकी पहली खेप वृंदावन भेजी जाती है. इसके अलावा मथुरा, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और इंग्लैंड तक भी इसकी सप्लाई की जाती है. होली के समय जयपुर आने वाले विदेशी पर्यटक इसे खास तौर पर खरीदते हैं और इसे शाही होली की यादगार के रूप में अपने साथ ले जाते हैं.

6/6

होली से दो-तीन महीने पहले ही गुलाल गोटा बनाने का काम शुरू हो जाता है. बाजार में छह गोटों की एक पैकिंग करीब 250 रुपये में मिलती है. ईको-फ्रेंडली और हर्बल होने के कारण लोग इसे केमिकल रंगों की तुलना में ज्यादा पसंद कर रहे हैं. 

सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी जयपुर की होली को अलग पहचान देती है. रंगों के इस त्योहार में जब गुलाल गोटा फूटता है, तो सिर्फ रंग नहीं बिखरते, बल्कि शाही इतिहास की झलक भी नजर आती है.

Advertisement
Advertisement