उत्तर प्रदेश के बरेली में हरदोई की रहने वाली 19 साल की रजिया ने इस्लाम धर्म छोड़कर सनातन धर्म अपना लिया है. रजिया का कहना है कि वह शुरू से ही सनातन धर्म में आस्था रखती थी और हिंदू देवी-देवताओं की पूजा करती थी. खास तौर पर वह भगवान शिव की पूजा करना पसंद करती थी, लेकिन उसके माता-पिता इसका विरोध करते थे. उनका कहना था कि इस्लाम धर्म में मूर्ति पूजा हराम है.
4 साल पहले दोस्ती प्यार में बदली
रजिया ने बताया कि उसका मन इस्लाम धर्म में नहीं लगता था. कुछ साल पहले वह राजस्थान में ईंट भट्ठे पर काम करने गई थी. वहीं उसकी मुलाकात बरेली निवासी तोताराम से हुई. दोनों की दोस्ती हुई और करीब 4 साल पहले यह दोस्ती प्यार में बदल गई.
बरेली लौटने पर रजिया को पता चला कि उसके परिवार ने खानदान में ही उसकी शादी इस्लामी रीति-रिवाज के अनुसार तय कर दी है. यह जानकारी मिलने के बाद उसने अपने प्रेमी तोताराम से शादी करने की जिद की. इसके बाद वह बरेली पहुंची और दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज से शादी कर ली. धर्म परिवर्तन के बाद रजिया ने अपना नाम बदलकर गौरी रख लिया है.
सावन में करती है भगवान शिव की आराधना
रजिया का कहना है कि वह शुरुआत से ही भगवान शिव की आराधना करती रही है. सावन के महीने में वह विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा करती है. इसी दौरान उसने अग्नि के सात फेरे लेकर तोताराम से विवाह किया और सनातन धर्म अपना लिया. उसका कहना है कि इस्लाम धर्म में महिलाओं को सम्मान नहीं मिलता, जबकि सनातन धर्म में महिलाओं को सम्मान दिया जाता है.
परिवार से जान का खतरा बताया
रजिया ने अपने परिवार से जान का खतरा भी जताया है. उन्होंने योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार भी लगाई है. उसका कहना है कि खास तौर पर उसके पिता और चाचा के बेटों से उसे खतरा है. परिवार को पता चल चुका है कि वह घर से भागकर अपने हिंदू प्रेमी के साथ शादी कर चुकी है और उसने अपना नाम बदलकर गौरी रख लिया है.
अगस्त मुनि आश्रम में हुई शादी
दोनों ने बरेली के अगस्त मुनि आश्रम पहुंचकर हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार शादी की. आश्रम के महंत पंडित केके शंखधार ने दोनों का शुद्धिकरण कराने के बाद विवाह की प्रक्रिया पूरी कराई. आश्रम की ओर से बताया गया कि दोनों ने जरूरी डॉक्यूमेंट जमा किए और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद विवाह संपन्न हुआ.
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