सोचिए, आपके चेहरे पर एक-दो मधुमक्खी भी आ जाए तो आप उन्हें हटाने के लिए तुरंत हाथ चलाने लगेंगे. लेकिन तमिलनाडु के एक 27 साल के युवक ने चेहरे पर हजारों मधुमक्खियों के बावजूद 5 घंटे से ज्यादा समय तक खुद को बिल्कुल स्थिर रखा. न हाथ हिलाया, न चेहरे पर कोई हरकत की. तिरुनेलवेली के वल्लियूर के इस युवक ने ऐसा करके नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया. खास बात यह है कि उसने यह कारनामा सिर्फ रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं किया, बल्कि लोगों को मधुमक्खियों और मधुमक्खी पालन की अहमियत समझाने के लिए किया.
5 घंटे 3 मिनट तक चेहरे पर मंडराती रहीं मधुमक्खियां
युवक का नाम इसक्की मुथु है, जिन्हें मुरुगन के नाम से भी जाना जाता है. रिकॉर्ड के दौरान इंडियन हनी बी उनके पूरे चेहरे पर बैठी रहीं. मुरुगन करीब 5 घंटे 3 मिनट तक बिना हिले-डुले बैठे रहे. यह रिकॉर्ड 20 फरवरी को वल्लियूर स्थित मारिया आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज में बनाया गया. इस उपलब्धि को Cholan World Records और China Book of World Records (CBWR) में दर्ज किया गया है. सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए सामने आए इस अनोखे रिकॉर्ड ने लोगों का ध्यान खींचा है.
खेती की पढ़ाई की फिर मधुमक्खियों को बनाया करियर
मुरुगन ने एग्रीकल्चर की पढ़ाई की है. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी या किसी दूसरे काम की जगह मधुमक्खी पालन को अपना फुल टाइम प्रोफेशन बनाया. उनका कहना है कि मधुमक्खियां सिर्फ शहद बनाने के काम नहीं आतीं. पर्यावरण में भी उनकी बड़ी भूमिका है. मधुमक्खियां फूलों में परागण यानी pollination करती हैं, जिससे पौधों में फल और बीज बनने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है.
आमतौर पर मधुमक्खी देखते ही लोग डर जाते हैं. मुरुगन इसी सोच को बदलना चाहते हैं. उनका मानना है कि सही जानकारी और सावधानी के साथ मधुमक्खियों के साथ काम किया जा सकता है. चेहरे पर हजारों मधुमक्खियों को बैठाकर घंटों तक स्थिर रहना भी इसी सोच का हिस्सा था. इस दौरान उन्हें लगातार धैर्य बनाए रखना था, क्योंकि मधुमक्खियां चेहरे पर लगातार घूम रही थीं. थोड़ी सी जल्दबाजी या अचानक हरकत रिकॉर्ड की पूरी कोशिश को मुश्किल में डाल सकती थी.
सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, किसानों के लिए कमाई का जरिया भी
मुरुगन का लक्ष्य केवल अपना रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं है. वह चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा किसान और युवा मधुमक्खी पालन को रोजगार और कमाई के विकल्प के तौर पर देखें. उनके मुताबिक, मधुमक्खियों की मदद से शहद और दूसरे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं. साथ ही खेती में परागण की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में भी इनकी अहम भूमिका है. तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय भी मधुमक्खियों और मधुमक्खी पालन को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता रहा है.
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