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नाव नहीं, चारपाई बनी सहारा... मां-बच्चे को पार कराई गई नदी, Video Viral

यूपी के आगरा में एक प्रसूता को रात 2 बजे चारपाई और ट्यूब के सहारे नदी पार करना पड़ा और अस्पताल जाना पड़ा. इसके बाद जच्चा-बच्चा दोनों को इसी रास्ते से वापस गांव लाया गया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

Agra News
नितिन उपाध्याय
  • आगरा,
  • 14 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:23 PM IST

उत्तर प्रदेश के आगरा के बाह क्षेत्र में उटंगन नदी पर पुल नहीं होने का खामियाजा एक प्रसूता और उसके नवजात को जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ा. ग्राम पंचायत अरनौटा के गांव सुखलालपुरा की प्रसूता को परिजनों ने रात के अंधेरे में ट्यूब के सहारे चारपाई पर लिटाकर उटंगन नदी पार कराई. प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को इसी खतरनाक तरीके से वापस गांव लाया गया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

एंबुलेंस आ गई, लेकिन नदी बन गई मुसीबत-
जानकारी के मुताबिक, बुधवार रात करीब 2 बजे सुखलालपुरा निवासी रग्गी कुमार की पत्नी केशवती को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई. परिजनों ने तत्काल एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन गांव तक पहुंचने के लिए उटंगन नदी पर कोई पुल नहीं होने के कारण एंबुलेंस आगरा-बाह मार्ग पर गांव जयसिंह के पास ही पहुंच सकी. इसके बाद परिजनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रसूता को नदी के दूसरी ओर पहुंचाने की थी.

ट्यूब के सहारे प्रसूता ने पार की नदी-
रात में नदी पार कराने के लिए कोई दूसरा साधन उपलब्ध नहीं होने पर परिजनों ने एक ट्यूब का सहारा लिया. ट्यूब के ऊपर चारपाई रखी गई और उस पर प्रसूता केशवती को लिटाकर नदी पार कराई गई. नदी पार करने के बाद एंबुलेंस की मदद से उन्हें फतेहाबाद के अस्पताल पहुंचाया गया, जहां केशवती ने एक बेटे को जन्म दिया.

बृहस्पतिवार सुबह अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद नवजात और प्रसूता को परिजन फिर उसी रास्ते से गांव वापस लेकर आए. एक बार फिर चारपाई को ट्यूब पर रखकर नदी पार कराई गई. इस दौरान किसी ग्रामीण ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

कई बार हो चुकी है पुल बनाने की मांग-
ग्रामीणों का कहना है कि उटंगन नदी पर पुल या पुलिया निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है. बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण ग्रामीणों की मुश्किलें ओर बढ़ जाती हैं. ग्रामीणों के मुताबिक, पुल निर्माण की मांग को लेकर करीब दस दिनों तक धरना भी दिया गया था. बीते 22 जून को उप जिलाधिकारी बाह को जिलाधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपकर पुल निर्माण की मांग की गई थी. ग्रामीणों का दावा है कि उस समय दो महीने के भीतर पुलिया निर्माण शुरू कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन करीब तीन महीने बीतने के बाद भी मौके पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है.

गांववालों में है नाराजगी-
ग्रामीणों में प्रशासन की कथित वादाखिलाफी को लेकर नाराजगी है. उनका कहना है कि यह सिर्फ आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि बारिश के मौसम में मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की जिंदगी से जुड़ा गंभीर सवाल है. एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाने की स्थिति में किसी भी आपातकालीन मरीज को इसी तरह नदी पार कराने की मजबूरी बन जाती है.

वहीं, एसडीएम बाह विनोद कुमार ने फोन पर बताया कि क्षेत्र के ग्रामीणों ने पुल निर्माण की मांग को लेकर उन्हें ज्ञापन सौंपा था. ज्ञापन को नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई के लिए शासन को भेज दिया गया है.

अब सवाल यह है कि जिस पुल की मांग ग्रामीण लंबे समय से कर रहे हैं, उसके निर्माण के लिए आखिर उन्हें और कितने ऐसे जोखिम भरे हालात से गुजरना पड़ेगा?

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