ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू होने के महज एक महीने के भीतर इसका बड़ा असर सामने आया है. देश की इंटरनेट नियामक संस्था ने बताया कि सोशल मीडिया कंपनियों ने मिलकर करीब 47 लाख ऑस्ट्रेलियाई यंगस्टर्स के अकाउंट डिएक्टिवेट कर दिए हैं. यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि नया कानून तेजी और सख्ती के साथ लागू किया गया है.
प्रधानमंत्री ने दिए आंकड़े
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने शुक्रवार यानी 16 जनवरी को बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने अब तक लगभग 47 लाख अंडर-16 अकाउंट हटाए हैं. यह कार्रवाई उस कानून के तहत की गई है, जो 10 दिसंबर से लागू हुआ था. सरकार का कहना है कि यह कदम बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है.
दुनियाभर की नजर ऑस्ट्रेलिया पर
यह कानून पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है. कई देशों के रेगुलेटर इस फैसले को बारीकी से देख रहे हैं. फ्रांस, मलेशिया और इंडोनेशिया पहले ही ऐसे ही कानून लाने की बात कह चुके हैं. वहीं, कुछ यूरोपीय देश और अमेरिका के कई राज्य भी इसी तरह के नियमों पर विचार कर रहे हैं.
कंपनियों पर भारी जुर्माने का प्रावधान
सरकार द्वारा जारी किए गए ये आंकड़े पहली आधिकारिक रिपोर्ट हैं, जो यह दिखाते हैं कि सोशल मीडिया कंपनियां कानून का पालन करने के लिए गंभीर कदम उठा रही हैं. इस कानून के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 49.5 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. हालांकि, इस कानून में बच्चों या उनके माता-पिता को किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है.
उम्मीद से कहीं ज्यादा निकले आंकड़े
सरकार के मुताबिक, हटाए गए अकाउंट्स की संख्या उन अनुमानों से कहीं ज्यादा है, जो कानून लागू होने से पहले लगाए गए थे. जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर देखा जाए तो यह संख्या 10 से 16 साल के हर बच्चे पर औसतन दो अकाउंट के बराबर है.
मेटा पहले ही कर चुका है कार्रवाई
सोशल मीडिया कंपनी Meta ने पहले ही दावा किया था कि वह Instagram, Facebook और Threads से करीब 5.5 लाख अंडरएज अकाउंट हटा चुकी है. अब सरकारी आंकड़ों से साफ है कि बाकी प्लेटफॉर्म्स ने भी बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है.
क्या बनेगा वैश्विक मॉडल?
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऑस्ट्रेलिया का यह कानून आने वाले समय में दूसरे देशों के लिए एक मॉडल बन सकता है. जिस तेजी से इसका असर दिखा है, उससे यह साफ हो गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार अब सख्त रुख अपनाने लगी हैं.
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