यूपी के बांदा से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां डेथ सर्टिफिकेट बनाने में बांदा नगर पालिका को 9 महीने लग गए और न बनाने की वजह सुनकर अदालत भी हैरान में पड़ गई. नगर पालिका प्रशासन ने अजीबोगरीब जवाब देते हुए कहा कि साहब आवेदन में व्हाइटनर और ओवर राइटिंग थी, इसलिए प्रमाण पत्र नहीं बनाया. इसके बाद अदालत ने सभी साक्ष्य तलब किए. अदालत के फटकार लगते ही नगर पालिका ने आनन फानन में मृत्यु प्रमाण भी जारी कर दिया, जबकि पहले भी पीड़ित की तरफ से सभी जरूरी दस्तावेज, कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र का आवेदन दिया गया था. भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद नगर पालिका प्रशासन हरकत में आया. अब अदालत ने विभागीय लापरवाही मानते हुए सख्त कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए हैं. अदालत ने कहा है कि आखिर सिर्फ मृत्यु प्रमाण पत्र बनने में 9 माह कैसे लग गए?
मां का मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के लिए दिया था आवेदन
स्थाई लोक अदालत के वरिष्ठ सदस्य डॉक्टर ब्रह्मदत्त सिंह ने बताया कि स्थाई लोक अदालत में एक वाद दायर किया गया. इसमें पीड़ित ने बताया कि अगस्त 2025 में उसने अपनी मां का मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने का आवेदन दिया था. आवेदन के साथ अपना शपथपत्र, गवाह, आधार कार्ड सहित पूरी सरकारी प्रक्रिया पूरी की. नगर पालिका प्रशासन ने जांच पड़ताल की और इसके बावजूद मृत्यु प्रमाण जारी नहीं किया. इसके बाद पीड़ित ने अक्टूबर 2025 में वाद दायर किया, सुनवाई शुरू हुई. अदालत ने पालिका प्रशासन को फटकार लगाते हुए तलब किया, जिस पर नगर पालिका ने जो जवाब दिया वो हैरान कर देने वाला था. नगर पालिका ने जवाब में बताया कि आवेदन में ओवर राइटिंग, व्हाइटनर के साथ मृत्यु का कोई साक्ष्य नहीं है, जिस कारण डेथ सर्टिफिकेट नहीं बनाया गया. बाद में मई 2026 में नगर पालिका ने SDM को भेजी गई रिपोर्ट में सभी फार्मेलटी पूरी करने के साथ-साथ प्रमाण पत्र जारी करने की संस्तुति भी कर दी.
दोषी कमर्चारी पर कार्रवाई के आदेश
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जहां अब तक तमाम कमियां बताकर याची का प्रमाण पत्र नही बनाया, अब क्यों बना दिया गया. अदालत ने मृत्यु प्रमाण पत्र 9 माह में बनने में बड़ी लापरवाही माना. इसमें अनैतिक तरीके से धन की मांग को मौखिक रूप से सुनकर पालिका प्रशासन को तत्काल दोषी कमर्चारी पर विधिक कार्रवाई के आदेश दिए हैं. बांदा के स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष विवेक कुमार, वरिष्ठ सदस्य डॉ ब्रह्मदत्त सिंह और सदस्या शिवांगी शुक्ला की पीठ ने वाद स्वीकार करते हुए अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका परिषद बांदा को निर्देशित किया कि मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में हुई विभागीय लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारी अधिकारी को चिह्नित किया जाए. इसके बाद जांच कर विधिक कार्रवाई कर अदालत को अवगत कराएं.