लाइफ जैकेट से लेकर इमरजेंसी प्लान तक... नाव की सवारी से पहले जान लें सेफ्टी टिप्स, बरगी हादसे से उठा सवाल

अक्सर लोग उत्साह में नाव की क्षमता को नजरअंदाज कर देते हैं. छोटी नावों में नीचे एक सफेद पट्टी बनी होती है, जो यह संकेत देती है कि नाव पर कितना भार सुरक्षित है. अगर यह पट्टी पानी में डूबने लगे तो समझ लें कि नाव पर ज्यादा भार हो गया है. बड़ी नावों और क्रूज में भी यात्रियों की सीमा तय होती है. किसी भी स्थिति में ओवरलोड नाव में बैठना जोखिम भरा हो सकता है.

boating safety tips
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 02 मई 2026,
  • अपडेटेड 1:01 PM IST

देशभर में गर्मियों और छुट्टियों के मौसम में लोग पहाड़ों, नदियों और समुद्रों की ओर रुख करते हैं. जहां पहाड़ों पर एडवेंचर स्पोर्ट्स का क्रेज रहता है, वहीं नदी और झीलों वाले इलाकों में बोटिंग लोगों के लिए खास आकर्षण होती है. लेकिन कई बार यही रोमांच भारी पड़ जाता है. हाल ही में जबलपुर और मथुरा में हुए नाव हादसों ने एक बार फिर सुरक्षा नियमों की अनदेखी के खतरनाक परिणामों को उजागर किया है. ऐसे में जरूरी है कि बोटिंग से पहले कुछ अहम सावधानियों को समझा और अपनाया जाए.

नाव की क्षमता का रखें ध्यान
अक्सर लोग उत्साह में नाव की क्षमता को नजरअंदाज कर देते हैं. छोटी नावों में नीचे एक सफेद पट्टी बनी होती है, जो यह संकेत देती है कि नाव पर कितना भार सुरक्षित है. अगर यह पट्टी पानी में डूबने लगे तो समझ लें कि नाव पर ज्यादा भार हो गया है. बड़ी नावों और क्रूज में भी यात्रियों की सीमा तय होती है. किसी भी स्थिति में ओवरलोड नाव में बैठना जोखिम भरा हो सकता है.

मौसम की जानकारी लेना जरूरी
कई हादसे अचानक बदलते मौसम की वजह से होते हैं. जबलपुर के हादसे में भी शुरुआत में मौसम ठीक था, लेकिन बीच नदी में तेज हवा चलने लगी, जिससे क्रूज पलट गई. इसलिए बोटिंग से पहले मौसम की जानकारी लेना बेहद जरूरी है. 

लाइफ जैकेट है सबसे बड़ा सुरक्षा कवच
लाइफ जैकेट पहनना बोटिंग के दौरान सबसे जरूरी नियम है. चाहे आपको तैरना आता हो या नहीं, जैकेट जरूर पहनें. इसे पहनने के बाद एक बार जांच भी लें कि यह सही स्थिति में है या नहीं.

लोकल नियमों का पालन करें
हर जगह बोटिंग के अपने नियम होते हैं. कुछ क्षेत्रों में गहरे पानी, तेज धारा या प्रतिबंधित इलाकों में जाने की मनाही होती है. इन नियमों को समझना और उनका पालन करना बेहद जरूरी है. लापरवाही करने पर दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

इमरजेंसी प्लान की जानकारी रखें
नाव में बैठने से पहले यह जानना जरूरी है कि आपात स्थिति में क्या करना है. रेस्क्यू उपकरण कहां रखे हैं, लाइफ सेविंग टूल्स कैसे काम करते हैं, यह जानकारी पहले ही ले लें. साथ ही नाव चलाने वाले व्यक्ति का अनुभव भी जानना जरूरी है.

समय का रखें खास ध्यान
सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद बोटिंग से बचना चाहिए. अंधेरे में दृश्यता कम हो जाती है और हादसे का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति पानी में डूब जाए और बाहर निकालने के बाद बेहोश हो जाए, तो सीपीआर की जानकारी होना जीवन बचाने में मददगार साबित हो सकता है.

ये भी पढ़ें: 

 

Read more!

RECOMMENDED