गर्मी के मौसम में कार का एसी खराब होना किसी बड़ी परेशानी से कम नहीं होता. अक्सर जब एसी अचानक ठंडी हवा देना बंद कर देता है, तो लोग घबरा जाते हैं और सीधे मैकेनिक के पास पहुंच जाते हैं. मैकेनिक बिना पूरी जांच किए नया कंप्रेशर लगाने की सलाह दे देते हैं, जिससे हजारों रुपए का खर्च आ जाता है. जबकि सच यह है कि हर बार पूरा कंप्रेशर बदलना जरूरी नहीं होता. कई मामलों में छोटी-सी खराबी को ठीक करके पुराना कंप्रेशर दोबारा शानदार तरीके से काम करने लगता है.
छोटी खराबी बंद कर सकता एसी
कार के एसी सिस्टम में कंप्रेशर सबसे अहम हिस्सा माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर समस्या का कारण वही हो. अगर एसी ऑन करने पर किट-किट जैसी आवाज आ रही है या कंप्रेशर का क्लच सही तरीके से काम नहीं कर रहा, तो दिक्कत उसके छोटे पार्ट्स में भी हो सकती है. जिसकी वजह से एसी की कूलिंग प्रभावित होती है. अच्छी बात यह है कि इन पार्ट्स को अलग से बदला जा सकता है और इसमें ज्यादा खर्च भी नहीं आता.
गैस लीक से कम हो सकती कूलिंग
कई बार एसी की कूलिंग कम होने के पीछे गैस लीक सबसे बड़ी वजह होती है. यह समस्या अक्सर कंप्रेशर की ऑयल सील खराब होने से पैदा होती है. ऐसी स्थिति में पूरी यूनिट बदलने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि केवल सील किट बदलकर समस्या को ठीक किया जा सकता है.
कब जरूरी है नया कंप्रेशर?
कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं जहां कंप्रेशर बदलना ही सबसे सही विकल्प माना जाता है. अगर कंप्रेशर पूरी तरह सीज हो चुका है, उसके अंदर के पिस्टन टूट गए हैं या जाम हो गए हैं, या फिर अंदर काला स्लज जमा हो गया है, तो रिपेयर ज्यादा समय तक टिकाऊ साबित नहीं होता. ऐसे मामलों में बार-बार मरम्मत कराने से बेहतर नया कंप्रेशर लगवाना होता है.
कैसे करें कार की सही देखभाल
कार के एसी को लंबे समय तक बेहतर स्थिति में रखने के लिए रेगुलर देखभाल बेहद जरूरी है. समय-समय पर केबिन फिल्टर साफ कराना, साल में कम से कम एक बार रेडिएटर और कंडेंसर की सफाई करवाना और सही कूलेंट का इस्तेमाल करना जरूरी माना जाता है.
इसके अलावा अलग-अलग ब्रांड के कूलेंट को आपस में मिलाने से बचना चाहिए. अगर कूलेंट में पानी मिलाना हो तो हमेशा डिस्टिल्ड पानी का ही इस्तेमाल करें. छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर आप एसी की लाइफ बढ़ा सकते हैं और भारी खर्च से बच सकते हैं.