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दिल्ली का वायरल रिक्शावाला! 16 साल से चांदनी चौक में चला रहा रिक्शा, आसानी से बोलते हैं कई विदेशी भाषाएं

दिल्ली में एक रिक्शावाला सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इस रिक्शावाले का नाम असलम है. असलम पिछले 16 साल से चांदनी चौक में रिक्शा चलाते हैं. असलम को कई भाषाएं आती हैं. वो अंग्रेजी, स्पेनिश, इटैलियन, जर्मन जैसी बोलते हैं. उन्होंने इन भाषाओं की कोई पढ़ाई नहीं की है. वो पर्यटकों से बात करते-करते भाषाएं सीख लिए हैं.

Delhi Viral Rikshaw wala
मनीष चौरसिया
  • नई दिल्ली,
  • 03 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:00 PM IST

दिल्ली की तंग गलियों में दौड़ता एक रिक्शा और उसे चलाने वाला ऐसा शख्स, जिसकी पहचान अब सिर्फ रिक्शावाला नहीं, बल्कि 'चलता-फिरता लैंग्वेज गाइड' बन गई है. चांदनी चौक के असलम अपने विदेशी मेहमानों से उनकी ही भाषा में बात करते हैं और यही हुनर अब सोशल मीडिया पर लाखों लोगों का दिल जीत रहा है. 

कई भाषाएं जानता है ये रिक्शावाला-
पुरानी दिल्ली की गलियों में जब विदेशी पर्यटक घूमने निकलते हैं, तो कई बार उनका सामना एक ऐसे रिक्शावाले से होता है, जो अंग्रेजी ही नहीं, बल्कि स्पेनिश, इटैलियन, जर्मन, जैसी कई विदेशी भाषाओं में उनका स्वागत करता है. 

किसी भी विदेशी भाषा की पढ़ाई नहीं की-
ये चांदनी चौक के मोहम्मद असलम हैं. इनके वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. असलम बताते हैं कि उन्होंने किसी बड़े संस्थान से विदेशी भाषाओं की पढ़ाई नहीं की. चांदनी चौक आने वाले विदेशी पर्यटकों से बातचीत करते-करते, उनसे नए शब्द सीखकर और यूट्यूब वीडियो देखकर उन्होंने अलग-अलग भाषाओं पर पकड़ बनाई. बड़ी बात ये कि असलम बताते हैं कि उन्हें अंग्रेजी या कोई भी दूसरी विदेशी भाषा पढ़नी भी नहीं आती. यही वजह है कि जब कोई विदेशी उनकी भाषा सुनता है तो हैरान भी होता है और खुश भी.

विरासत से रूबरू कराते हैं असलम-
असलम सिर्फ सवारी को मंज़िल तक नहीं पहुंचाते, बल्कि रास्ते में चांदनी चौक की ऐतिहासिक हवेलियों, मसाला बाज़ार, मशहूर खाने-पीने की जगहों और पुरानी दिल्ली की विरासत से भी रूबरू कराते हैं. वो भी उनकी भाषा में. उनके लिए हर सवारी एक मेहमान है और हर सफर एक सांस्कृतिक अनुभव. 

सोशल मीडिया पर लाखों व्यूज- 
सोशल मीडिया पर असलम के लाखों व्यूज़ बटोर रहे वीडियोज इस बात की सबूत हैं कि मेहनत, सीखने की ललक और आत्मविश्वास किसी भी इंसान को खास बना सकता है. एक साधारण रिक्शावाले ने अपनी भाषा की प्रतिभा से न सिर्फ विदेशी पर्यटकों का दिल जीता, बल्कि भारत की मेहमाननवाज़ी की भी नई पहचान बना दी है. असलम कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि मुझे पूरी भाषा अच्छे से आती है. मैं बस कुछ कुछ चीजें सीखकर बोलने की कोशिश करता हूँ. लेकिन मैं चाहता हूँ कि मेरे बच्चे अच्छे से पढ़ाई करें, मुझे पढ़ने का मौक़ा नहीं मिला. लेकिन मैं अपने बच्चों को खूब पढ़ाना चाहता हूँ.

चांदनी चौक की गलियों में रिक्शा चलाने वाले असलम यह साबित करते हैं कि पहचान काम से नहीं, काबिलियत से बनती है. विदेशी भाषाओं का उनका हुनर आज उन्हें सोशल मीडिया का स्टार और दिल्ली की एक नई पहचान बना चुका है.

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