सहारनपुर देहात विधानसभा के यह देश का पहला हाईटेक और ISO 2001:2015 सर्टिफाइड स्मार्ट गांव है, जिसे पूरी तरह से आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से सजाया गया है, गांव थरौली ने गैस संकट के दौर में एक मिसाल पेश की है. जहां देशभर में एलपीजी सिलेंडर के लिए लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, वहीं इस छोटे से गांव का एक भी व्यक्ति गैस लेने के लिए लाइन में खड़ा नहीं हुआ. करीब 30 परिवारों वाले इस गांव में लगभग 50% घरों में गोबर गैस प्लांट लगे हैं, जिनसे सालभर खाना बनाया जा रहा है. पिछले 10 वर्षों से यहां लगातार बायोगैस प्लांट लगाए जा रहे हैं और अब गांव तेजी से LPG मुक्त होने की ओर बढ़ रहा है.
गोबर गैस पर बनता है खाना
गांव के रणपाल बताते हैं कि करीब साढ़े तीन साल से उनके घर में गोबर गैस प्लांट लगा है और इसी से पूरा खाना बनता है. उनका कहना है कि इस पर बना खाना बिल्कुल चूल्हे जैसा स्वाद देता है. इस पहल की शुरुआत करीब 10 साल पहले हुई थी, जब आईटीसी और मदर डेयरी की मदद से ग्रामीणों ने प्लांट लगवाए. सब्सिडी के तहत मात्र 6000 में लगने वाले इस प्लांट से 7-8 घंटे में गैस तैयार हो जाती है, जिससे पूरे परिवार का खाना आराम से बन जाता है.
ग्रामीण संदीप कुमार के अनुसार उनके पास LPG कनेक्शन तो है, लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं होता. उन्होंने बताया कि 4 साल पहले लगाए गए गोबर गैस प्लांट से ही उनका पूरा घर चलता है. वहीं गृहणी रूमलेस कहती हैं कि इस गैस पर बना खाना स्वादिष्ट और सुरक्षित होता है, और मेहमानों के लिए भी आसानी से 10-15 लोगों का खाना तैयार हो जाता है. गांव के ज्यादातर लोग अब इसी विकल्प को अपना चुके हैं.
यहां के लोग खुद गैस तैयार कर रहे
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि संदीप चौधरी का कहना है कि थरौली गांव को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया है. उन्होंने बताया कि गांव का कोई भी व्यक्ति गैस संकट के दौरान लाइन में नहीं लगा, क्योंकि यहां के लोग खुद गैस तैयार कर रहे हैं. अब बाकी परिवार भी गोबर गैस प्लांट लगाने की तैयारी में हैं, जिससे जल्द ही यह गांव पूरी तरह LPG मुक्त बन सकता है.