Ganesh Chaturthi 2025: धार्मिक एकता की अनोखी मिसाल! स्विस नागरिक ने मुस्लिम घर में की गणेश पूजा

मार्टिन मूल रूप से स्विट्जरलैंड के सेंट्रल रीजन के रहने वाले हैं. सात साल पहले उन्होंने हिंदू रीति-रिवाजों का पालन शुरू किया था.

Ganesh Chaturthi 2025
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 29 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 2:04 PM IST

कर्नाटक के कप्पल जिले के आनेगुंडी गांव में एक अनोखा और प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है. स्विट्जरलैंड से आए मार्टिन नामक एक स्विस ईसाई नागरिक ने गणेश चतुर्थी के अवसर पर उस मुस्लिम परिवार के किराए के घर में गणेश प्रतिमा स्थापित की है, जिसमें वे पिछले एक साल से रह रहे हैं. इस कदम की खास बात यह है कि घर के मालिक दस्तगीर महबूब ने उन्हें इस पूजा के लिए अनुमति दी और स्थानीय मुस्लिम युवाओं ने भी इसमें सहयोग किया.

स्विस नागरिक ने अपनाई भारतीय संस्कृति
मार्टिन मूल रूप से स्विट्जरलैंड के सेंट्रल रीजन के रहने वाले हैं. सात साल पहले उन्होंने हिंदू रीति-रिवाजों का पालन शुरू किया था. एक साल पहले वे नौकरी के दबाव से बचने के लिए भारत आए और अपनी पत्नी और दो बच्चों को स्विट्जरलैंड में छोड़कर यहां बस गए. उन्होंने चिंतामणि रोड पर अंजनेया मंदिर के पास स्थित दस्तगीर महबूब के घर को किराए पर लिया. समय के साथ वे स्थानीय लोगों के साथ घुल-मिल गए. इसी बीच उन्होंने पहली बार गणेश चतुर्थी मनाने का निर्णय लिया.

मुस्लिम घर में गणेश प्रतिमा की स्थापना
मार्टिन ने घर के मालिक दस्तगीर महबूब से बात करके गणेश प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति ली, जिसे उन्होंने खुशी-खुशी स्वीकार किया. इस दौरान आनेगुंडी गांव के मुस्लिम युवाओं ने भी मार्टिन की मदद की. मार्टिन ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, "हिंदू धर्म की पूजा-पद्धति, मंत्र, साधना और संस्कृति ने मुझे मानसिक शांति दी है. खासकर 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करने से मुझे आत्मिक सुकून मिलता है."

स्थानीय लोगों का सहयोग और प्रेरणा
गांव की एक महिला उमा ने मार्टिन को गणेश चतुर्थी के महत्व के बारे में बताया. उनकी बातों से प्रेरित होकर मार्टिन ने प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया. मार्टिन ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, "जब मैं स्विट्जरलैंड से यहां आया, तो कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा. लेकिन स्थानीय लोगों के सहयोग से सब समस्याएं हल हो गईं. इस सुख का कारण भगवान गणेश हैं, इसलिए मैंने गणेश उत्सव मनाने का फैसला किया."

हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल
इसी तरह का एक और उदाहरण अलवंडी गांव (कप्पल तालुक) में भी देखने को मिला. यहां मुस्लिम युवाओं और हिंदू युवाओं ने मिलकर विजया गणपति मंदिर में गणेश प्रतिमा की विशेष पूजा और अभिषेक किया. इस अवसर पर सामूहिक भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें दोनों समुदायों के लोग शामिल हुए. यह कार्यक्रम कई सालों से गेलयारा बलगा संगठन की ओर से आयोजित किया जा रहा है.

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