Ant Chutney Special: जानें कैसे बनती है छत्तीसगढ़ की मशहूर लाल चींटी की चटनी... क्या हैं इसके वैज्ञानिक फायदे

लाल चींटी की चटनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है. इसमें मौजूद एसिड पाचन को बेहतर बनाता है और भूख बढ़ाने में मदद करता है. आदिवासी इलाकों में इसे मौसमी बीमारियों से बचाव और शरीर में ऊर्जा बनाए रखने के लिए खाया जाता है.

कैसे बनता है लाल चींटी की चटनी
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 04 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:57 PM IST

छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति अपने अनोखे खानपान के लिए पूरे देश में जानी जाती है. यहां की सबसे खास और चर्चित रेसिपी में लाल चींटी की चटनी, जिसे स्थानीय भाषा में चापड़ा चटनी कहा जाता है. यह चटनी स्वाद में खट्टी, तीखी और बेहद अनोखी होती है. पीढ़ियों से आदिवासी समुदाय इसे न सिर्फ स्वाद के लिए बल्कि सेहत के लिए भी इस्तेमाल करता आ रहा है.

लाल चींटी की चटनी बनाने का सामान 

  • लाल चींटियां और उनके अंडे
  • हरी मिर्च
  • लहसुन की कलियां
  • अदरक
  • नमक स्वाद अनुसार
  • थोड़ा-सा धनिया

लाल चींटी की चटनी बनाने का तरीका

  • सबसे पहले जंगल या पेड़ों से सावधानीपूर्वक लाल चींटियां और उनके अंडे इकट्ठा किए जाते हैं. 
  • इन्हें साफ पानी से धोया जाता है, ताकि मिट्टी निकल जाएं. 
  • इसके बाद सिलबट्टे या मिक्सर में लाल चींटियां, हरी मिर्च, लहसुन और अदरक डाला जाता है. 
  • अब इसमें स्वाद के अनुसार नमक मिलाकर अच्छे से पीसा जाता है. 
  • पारंपरिक तरीके में इसे सिलबट्टे पर पीसना ज्यादा पसंद किया जाता है, क्योंकि इससे चटनी का असली स्वाद बरकरार रहता है.
  • जब चटनी तैयार हो जाए तो ऊपर से थोड़ा-सा हरा धनिया मिलाया जाता है. 
  • यह चटनी बिना तेल के बनती है और बेहद पौष्टिक मानी जाती है. 
  • इसे चावल या रागी की रोटी के साथ खाया जाता है.

सेहत के वैज्ञानिक फायदे
वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो लाल चींटियों में फॉर्मिक एसिड पाया जाता है, जो शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है. यही कारण है कि इस चटनी का स्वाद हल्का खट्टा लगता है. इसके अलावा लाल चींटियों में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और जिंक जैसे जरूरी पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं. आदिवासी मान्यताओं के साथ-साथ आधुनिक रिसर्च भी बताती है कि यह चटनी जोड़ों के दर्द, शरीर की सूजन और कमजोरी को कम करने में सहायक हो सकती है.
छत्तीसगढ़ की यह पारंपरिक लाल चींटी की चटनी स्वाद, पोषण और विज्ञान तीनों का बेहतरीन संगम है, जो आज भी अपनी देश पभ में अपनी खास पहचान बनाए हुए है. 

 

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