छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति अपने अनोखे खानपान के लिए पूरे देश में जानी जाती है. यहां की सबसे खास और चर्चित रेसिपी में लाल चींटी की चटनी, जिसे स्थानीय भाषा में चापड़ा चटनी कहा जाता है. यह चटनी स्वाद में खट्टी, तीखी और बेहद अनोखी होती है. पीढ़ियों से आदिवासी समुदाय इसे न सिर्फ स्वाद के लिए बल्कि सेहत के लिए भी इस्तेमाल करता आ रहा है.
लाल चींटी की चटनी बनाने का सामान
लाल चींटी की चटनी बनाने का तरीका
सेहत के वैज्ञानिक फायदे
वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो लाल चींटियों में फॉर्मिक एसिड पाया जाता है, जो शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है. यही कारण है कि इस चटनी का स्वाद हल्का खट्टा लगता है. इसके अलावा लाल चींटियों में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और जिंक जैसे जरूरी पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं. आदिवासी मान्यताओं के साथ-साथ आधुनिक रिसर्च भी बताती है कि यह चटनी जोड़ों के दर्द, शरीर की सूजन और कमजोरी को कम करने में सहायक हो सकती है.
छत्तीसगढ़ की यह पारंपरिक लाल चींटी की चटनी स्वाद, पोषण और विज्ञान तीनों का बेहतरीन संगम है, जो आज भी अपनी देश पभ में अपनी खास पहचान बनाए हुए है.
ये भी पढ़ें
ये भी देखें