ड्रैगन फ्रूट आजकल काफी पसंद किया जाने वाला फल है. इसका पौधा देखने में भी सुंदर लगता है. अच्छी बात यह है कि इसे घर की छत, बालकनी या गार्डन में गमले के अंदर भी उगाया जा सकता है. ड्रैगन फ्रूट को बीज से उगाने के लिए थोड़ी मेहनत और पैशेंस की जरूरत होती है. सही मिट्टी, धूप, पानी और खाद मिले तो घर पर भी इसका पौधा अच्छी तरह बढ़ सकता है.
सबसे पहले एक अच्छा और पका हुआ ड्रैगन फ्रूट लें. फल के अंदर मौजूद छोटे-छोटे काले बीज निकालकर उन्हें पानी से अच्छी तरह साफ कर लें. बीज पर फल का गूदा नहीं रहना चाहिए. इसके बाद इन्हें कुछ समय के लिए सुखा लें. बीज से पौधा तैयार होने में समय लग सकता है, इसलिए शुरुआत से ही धैर्य रखना पड़ेगा.
ड्रैगन फ्रूट के लिए ऐसी मिट्टी बेहतर रहती है जिसमें पानी ज्यादा देर तक न रुके. गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद जरूर होने चाहिए. मिट्टी में गार्डन सॉयल के साथ रेत और जैविक खाद जैसे गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिला सकते हैं. इससे मिट्टी हल्की रहेगी और पौधे की जड़ों को बढ़ने में मदद मिलेगी.
गमले में तैयार मिट्टी भरकर बीजों को ऊपर से डालें और उनके ऊपर मिट्टी की बहुत पतली परत डालें. इसके बाद हल्का पानी दें. मिट्टी को नम रखें, लेकिन उसमें पानी जमा न होने दें. बीजों को अंकुरित होने में मौसम और देखभाल के अनुसार कुछ सप्ताह लग सकते हैं. अनुकूल स्थिति में अंकुर करीब 1 से 5 सप्ताह में दिखाई दे सकते हैं.
जब पौधा निकल आए तो उसे ऐसी जगह रखें जहां रोशनी मिले. ड्रैगन फ्रूट गर्म मौसम में अच्छी तरह बढ़ता है और इसे रोज कई घंटे धूप की जरूरत होती है. पौधा बड़ा होने पर इसे ऊपर चढ़ने के लिए मजबूत लकड़ी या डंडे का सहारा दें. यह बेल की तरह बढ़ता है, इसलिए सहारा देने से इसकी ग्रोथ बेहतर होती है.
पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए समय-समय पर जैविक खाद डाल सकते हैं. गोबर की खाद और वर्मीकम्पोस्ट जैसे ऑप्शन उपयोगी हैं. खाद डालते समय मात्रा का ध्यान रखें. जरूरत से ज्यादा खाद देने से पौधे को नुकसान भी हो सकता है.
ड्रैगन फ्रूट कैक्टस परिवार का पौधा है, इसलिए इसे बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. मिट्टी सूखने लगे तभी पानी दें. लगातार गीली मिट्टी रहने से जड़ों को नुकसान हो सकता है. सही धूप, अच्छी मिट्टी, जैविक खाद और संतुलित पानी के साथ आप घर पर ड्रैगन फ्रूट का पौधा आसानी से तैयार कर सकते हैं. हालांकि बीज से फल आने में काफी समय लग सकता है, इसलिए इसमें धैर्य रखना सबसे जरूरी है.