बारिश का मौसम घर में लगे पौधों की बेहतर देखभाल करने का अच्छा मौका होता है. अगर आपका कोई पौधा पहले की तरह ग्रो नहीं कर रहा है, उसकी पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं या गमले में जड़ें पूरी तरह फैल चुकी हैं, तो अब उसे बड़े गमले में शिफ्ट करने का समय आ गया है. सही तरीके से की गई रिपॉट्टिंग (गमला बदलना) पौधे की ग्रोथ को तेज करती है और उसे लंबे समय तक हेल्दी बनाए रखती है.
हर गार्डनिंग लवर के लिए यह समझना जरूरी है कि पौधे को कब बड़े गमले की जरूरत है. यदि पौधे की नई पत्तियां निकलना बंद हो गई हैं, उसकी ग्रो करने की स्पीड स्लो हो गई है या पत्तियां लगातार पीली हो रही हैं, तो यह साफ इशारा है कि जड़ों के लिए जगह कम पड़ गई है. कई बार तो गमले के नीचे बने ड्रेनेज होल से जड़ें बाहर दिखाई देने लगती हैं. इसके अलावा अगर पानी देने के कुछ ही समय बाद मिट्टी जल्दी सूख जाती है, तो भी समझ लें कि अब रिपॉट्टिंग का समय आ गया है.
रिपॉट्टिंग के लिए हमेशा बहुत बड़ा गमला चुनना सही नहीं होता है. हमेशा पुराने गमले से केवल 2 से 3 इंच बड़ा गमला ही लें. इससे जड़ों को धीरे-धीरे फैलने के लिए जगह मिलती है. नए गमले में ड्रेनेज होल होना भी जरूरी है, जिससे एक्स्ट्रा पानी आसानी से बाहर निकल सके और जड़ों में सड़न की परेशानी न हो.
पौधे को नए गमले में लगाने से एक दिन पहले उसमें हल्का पानी दें. इससे मिट्टी नरम हो जाती है और पौधा बिना नुकसान के आसानी से बाहर निकल आता है. पौधे को निकालते समय जड़ों को झटका नहीं देना चाहिए. अगर जड़ें बहुत ज्यादा आपस में उलझी हों, तो उन्हें हल्के हाथों से थोड़ा ढीला कर दें.
नए गमले के नीचे पहले मिट्टी के टुकड़े रखें, ताकि पानी आसानी से ड्रेनेज से बाहर निकल सके. इसके बाद ताजी, भुरभुरी और पोषक तत्वों वाली मिट्टी डालें. पौधे को गमले के बीच में सीधा रखें और चारों तरफ मिट्टी भरकर हल्के हाथों से दबा दें. ध्यान रखें कि मिट्टी को बहुत ज्यादा न दबाएं, ताकि जड़ों तक हवा पहुंचती रहे.
नए गमले में पौधा लगाने के तुरंत बाद पौधे को तेज धूप में रखने की गलती न करें. बेहतर होगा कि उसे कुछ दिनों तक ऐसी जगह रखें जहां हल्की रोशनी या छांव मिलती रहे. इससे जड़ें नए माहौल में आसानी से जम जाती हैं. इस दौरान जरूरत से ज्यादा पानी देने से भी बचें, क्योंकि ज्यादा नमी जड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है. साथ ही बार-बार पौधे को हिलाना या जड़ों को छेड़ना भी सही नहीं है.