रमज़ान का महीना इबादत, दान और कुरान की तिलावत के लिए खास माना जाता है. इस पाक महीने में रोज़ेदार शाम को इफ्तार के समय खजूर से रोज़ा खोलते हैं, जिसे सुन्नत माना गया है. इस्लामी किताबों में भी इसका उल्लेख मिलता है कि पैगंबर मुहम्मद खजूर से अपना रोज़ा खोलते थे. आज भी दुनिया भर के मुसलमान इसी राह पर चल रहे हैं.
दिनभर भूखे और प्यासे रहने के बाद शरीर को तुरंत ऊर्जा और पानी की जरूरत होती है. खजूर में पोटैशियम और प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर में पानी की कमी को तेजी से पूरा करने में मदद करते हैं. यही वजह है कि इफ्तार में खजूर को इतना अच्छा माना जाता है.
रमज़ान के दौरान खजूर की मांग अचानक बढ़ जाती है, जिसका फायदा उठाकर बाजार में मिलावटी और नकली खजूर भी बेचे जाने लगते हैं. कई बार कच्चे या जंगली खजूर को गुड़ के पानी में उबालकर सुखाया जाता है, जिससे वे दिखने में असली जैसे लगते हैं, लेकिन सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं.
मिलावट खजूर कैसे पहचानें