बसंत पंचमी का ये दिन भगवती मां सरस्वती को समर्पित है. इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व माना जाता है. पीला रंग ज्ञान, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि इस दिन पीले वस्त्र पहने जाते हैं और पीले रंग के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है. केसरिया खीर इसी परंपरा का हिस्सा है. दूध, चावल और केसर से बने इस खीर को बहुत शुद्ध तरीके से बनाया जाता है, साथ ही ये खीर स्वाद में आम खीर से बहुत टेस्टी होती है.
केसरिया खीर बनाने का सामान
केसरिया खीर बनाने का आसान तरीका
सबसे पहले चावल को साफ करके, 30 मिनटों के लिए भिगो कर छोड़ दें. एक गोल बर्तन में तबतक दूध डालकर धीमी आंच पर गाढ़ा होने तक उबालें. जब दूध जरूरत के हिसाब से गाढ़ा हो जाए तब उसमें भीगे हुए चावल डाल दें. अब इसे चलाते हुए पकने दें ताकि चावल भात की तरह बैठे नहीं .
जब चावल पूरी तरह गल जाएं और दूध थोड़ा और गाढ़ा हो जाए, तब इसमें चीनी डालें. चीनी डालने के बाद खीर को अच्छी तरह चलाएं. अब एक छोटे कटोरे में गर्म दूध लेकर उसमें केसर के धागे भिगो दें और इसे खीर में मिला दें. इससे खीर को सुंदर केसरिया रंग और खूशबू मिलती है. अब इलायची पाउडर और ड्राई फ्रूट्स डाल कर 5 मिनट के लिए और पकाएं. ऊपर से घी डालकर आंच बंद कर दें और खीर को थोड़ा ठंडा होने दें.
इस तरह लगाएं मां को भोग
खीर को साफ कटोरी में निकालें. बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र के सामने इसे श्रद्धा के साथ भोग के रूप में अर्पित करें. भोग लगाने के बाद खीर को प्रसाद के रूप में सभी को बांटें. यकिन मानिए, यह खीर बहुत स्वादिष्ट बनता है. अगर एक बार बनाएंगे तो बार-बार मन होगा खाने का.
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