अगर आप कभी पहाड़ों में गए हैं, तो आपने वहां की मैगी जरूर खाई होगी. ठंडी हवा, सामने पहाड़ और हाथ में गरम-गरम मैगी, यही तो पहाड़ों का असली स्वाद है. खास बात ये है कि पहाड़ी मैगी ज्यादा मसालेदार नहीं होती, बल्कि उसमें सब्जियों और देसी स्वाद की सादगी होती है. अच्छी खबर ये है कि आप वही स्वाद अब घर पर भी आसानी से बना सकते हैं.
पहाड़ी मैगी क्या होती है?
पहाड़ी मैगी आम मैगी से थोड़ी अलग होती है. इसमें ज़्यादा तेल या ज्यादा मसाले नहीं डाले जाते. ताजी सब्जियां, हल्की आंच और बनाने का तरीका, यही इसकी असल पहचान और स्वाद है.
ये मैगी आपको उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों जैसे देहरादून, नैनीताल, मसूरी और हिमाचल प्रदेश के शिमला, मनाली, धर्मशाला के छोटे ढाबों और स्टॉल्स पर मिलती है.
पहाड़ी मैगी बनाने का सामान
सब्जियों की तैयारी
एक कढ़ाई या पैन में तेल और थोड़ा सा मक्खन डालें. आंच धीमी रखें. अब इसमें प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें. प्याज का रंग ज्यादा ब्राउन नहीं करना है, बस हल्का ट्रांसपेरेंट रखें.
सब्जियां डालें
अब इसमें टमाटर, हरी मिर्च, हरी मटर और शिमला मिर्च डालें. सब्जियों को तेज आंच पर नहीं पकाएं. 2 से 3 मिनट धीमी आंच पर चलाते रहें ताकि सब्जियां अच्छे पक जाए और मैगी का स्वाद बना रहे.
पानी और मैगी डालें
अब पैन में पानी डालें. पानी इतना ही डालें कि मैगी अच्छे से पक जाए, ज्यादा नहीं. पानी उबलने लगे तो मैगी नूडल्स तोड़ कर डालें.
मसाला डालकर पकाएं
अब मैगी मसाला और हरा नमक डालें. इसके बाद सब को अच्छे से मिलाएं. ढककर 2 से 3 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें. बीच-बीच में चलाते रहें ताकि मैगी चिपके नहीं.
जब मैगी तैयार हो जाए, तो ऊपर से थोड़ा सा मक्खन और हरा धनिया डालें. गैस बंद करें और गरम-गरम सर्व करें.
पहाड़ी मैगी का स्वाद अलग क्यों होता है?
घर बैठे पहाड़ों का एहसास
अगर बाहर बारिश हो रही हो या शाम की ठंडी हवा चल रही हो, तो एक कप चाय के साथ ये पहाड़ी मैगी आपको सच में वादियों का एहसास दे देगी. इसे बनाना आसान है और स्वाद बिल्कुल वैसा ही, जैसा पहाड़ों में मिलता है.
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