इजराइल-ईरान के युद्ध संकट का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच चुका है. जिसके कारण एलपीजी गैस सिलेंडरों की कमी देखी जा रही है. हाल ही में सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग अवधि 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दी है. ऐसे हालात में घरेलू बजट संभालना मीडियम क्लास के लिए चुनौती बनता जा रहा है. यही वजह है कि अब कई लोग सिलेंडर वाले गैस चूल्हे की जगह इंडक्शन स्टोव को अपनाने लगे हैं. लेकिन इसको लेकर भी एक सवाल उठता है कि क्या इसके इस्तेमाल से बिजली बिल में इजाफा देखने को मिलेगा?
इंडक्शन से बढ़ेगा बिजली का बिल?
जब लोग गैस की जगह बिजली से चलने वाले इंडक्शन चूल्हे का इस्तेमाल करने की सोचते हैं, तो सबसे पहला सवाल यही होता है कि इससे बिजली का बिल कितना बढ़ेगा. दरअसल, इंडक्शन की बिजली खपत पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस मॉडल को चुनते हैं. उसे किस तरीके से इस्तेमाल करते हैं. बाजार में मिलने वाले सभी इंडक्शन एक जैसी बिजली नहीं खाते. ऐसे में सही फीचर्स और जरूरत के अनुसार मॉडल का चुनाव करना चाहिए.
सही वॉटेज चुनना है जरूरी
इंडक्शन खरीदते समय सबसे जरूरी है कि उसकी वॉटेज कितनी है. वॉटेज यह तय करता है कि चूल्हा कितनी तेजी से गर्म होगा और कितनी बिजली की खपत करेगा. मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए लगभग 2000 वॉट वाला इंडक्शन काफी होता है. वहीं यदि कोई अकेला रहता है या केवल चाय, कॉफी या हल्का नाश्ता बनाने के लिए इंडक्शन का उपयोग करना चाहता है, तो 800 से 1200 वॉट का मॉडल काफी है.
खास फीचर्स जो बिजली बचाएं
आजकल बाजार में मौजूद इंडक्शन स्मार्ट फीचर्स के साथ आते हैं. जो बिजली की बचत करने में मदद करते हैं.