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अस्थमा के मरीजों को यहां खिलाई जाती है जिंदा मछली, घंटों लाइन में लगकर लोग करवाते हैं फिश प्रसादम से इलाज, 180 साल से चली आ रही परंपरा

देशभर से मृगशिरा कार्तिक के मौके पर हजारों लोग यहां पहुंचते हैं. बच्चों से लेकर बूढ़े तक प्रसाद के लिए लाइन में लगते हैं. मरीजों को जिंदा मछली निगलनी होती है. मछली रोगियों के पेट में पहुंचकर दमा की बीमारी को ठीक करती है.

fish prasadam
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 12 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:24 AM IST

हैदराबाद में साल में एक दिन ऐसा आता है, जब एक छोटी सी मछली लाखों लोगों की उम्मीद लेकर आती है. लोग सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर यहां पहुंचते हैं. किसी को सांस की बीमारी से राहत की उम्मीद होती है तो कोई इसे परिवार की पुरानी परंपरा मानकर हर साल आता है. इस बार भी नामपल्ली स्थित एग्जीबिशन ग्राउंड में फिश प्रसादम वितरण के दौरान जबरदस्त भीड़ देखने को मिली.

सोमवार रात 9 बजे शुरू हुए इस आयोजन में मंगलवार दोपहर तक करीब 2.7 लाख लोगों ने प्रसादम लिया. माना जा रहा है कि कार्यक्रम खत्म होने तक यहां 3 लाख से भी ज्यादा लोग पहुंच सकते हैं.

क्या है फिश प्रसादम?
फिश प्रसादम एक विशेष परंपरा है, जिसे हैदराबाद का बथिनी परिवार करीब 180 वर्षों से निभा रहा है. इसमें एक छोटी जीवित मुरेल मछली के मुंह में एक खास हर्बल पेस्ट रखा जाता है और उसे लोगों को निगलने के लिए दिया जाता है. शाकाहारी लोगों को यही हर्बल मिश्रण गुड़ के साथ दिया जाता है. दावा है कि लगातार तीन साल ये प्रसाद खाने से दमा (अस्थमा) की बीमारी ठीक हो जाती है.

1845 से चली आ रही है परंपरा
बथिनी परिवार के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत साल 1845 में हुई थी. परिवार का दावा है कि एक संत ने उनके पूर्वज बथिनी वीरन्ना गौड़ को एक गुप्त हर्बल फॉर्मूला दिया था. इसके साथ शर्त रखी गई थी कि इसे हमेशा लोगों में मुफ्त बांटा जाएगा. तब से लेकर आज तक यह सेवा बिना किसी शुल्क के जारी है. हर साल मृगशिरा कार्ति के अवसर पर लाखों लोग यहां पहुंचते हैं.

ओडिशा, बिहार और कई राज्यों से पहुंचे लोग
यहां सिर्फ तेलंगाना ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों से लोग पहुंचते हैं. ओडिशा से आए कपिल ने बताया कि उनके परिवार में कई लोग सालों से यह प्रसादम लेते आ रहे हैं. इसी परंपरा को आगे बढ़ाने और खुद अनुभव करने के लिए वे हैदराबाद पहुंचे. बिहार से आए एक व्यक्ति ने कहा कि वह रातभर यात्रा करके यहां पहुंचे हैं. उनके मुताबिक, उन्हें इस परंपरा पर भरोसा है और पहले भी इससे फायदा मिला है.

हजारों लोगों के लिए किए गए विशेष इंतजाम
इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए थे. भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा, चिकित्सा सहायता, पेयजल और साफ-सफाई के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारी और स्वयंसेवक तैनात किए गए. लंबी लाइन के बावजूद लोगों में धैर्य और उत्साह दिखाई दिया. बुजुर्ग, बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य घंटों इंतजार कर अपनी बारी का इंतजार करते रहे.

इनपुट- अब्दुल बशीर

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