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प्यार, तकरार, कारागार, फिर इकरार... अब कोर्ट की इजाजत से जेल में सजा मंडप

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर जेल में मंडप सजाया गया, शहनाई बजी और शादी हुई. रेप और एससी/एसटी एक्ट के तहत 7 महीने से न्यायिक हिरासत में बंद एक आरोपी की शादी उसी युवती से हुई, जिसने मामला दर्ज कराया था. इस शादी के लिए कोर्ट से इजाजत मिली थी. दोनों पहले एक-दूसरे से प्यार करते थे. लेकिन युवक शादी से मुकरने लगा तो युवती ने मामला दर्ज करा दिया. अब फिर से दोनों में नजदीकियां बढ़ी और दोनों ने कोर्ट की इजाजत से शादी कर ली.

Jail Unique Marriage
धर्मेन्द्र महापात्र
  • बस्तर,
  • 27 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:39 PM IST

छत्तीसगढ़ में जगदलपुर केंद्रीय जेल के इतिहास में पहली बार जेल परिसर विवाह मंडप में तब्दील हुआ, जहां रेप और एससी/एसटी एक्ट के मामले में पिछले 7 महीने से न्यायिक हिरासत में बंद आरोपी ने उसी युवती के साथ सात फेरे लिए, जिसने उसके खिलाफ FIR दर्ज कराई थी. अदालत की अनुमति, जेल प्रशासन की निगरानी और दोनों परिवारों की मौजूदगी में संपन्न हुआ यह विवाह पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बन गया है.

पेट्रोल पंप पर साथ काम करते थे दोनों-
मामला बस्तर जिले के परपा थाना क्षेत्र के राजूर गांव का है. सुरेश सेठिया और युवती जगदलपुर के एक पेट्रोल पंप पर साथ काम करते थे. साथ काम करने के दौरान दोनों के बीच दोस्ती हुई, जो धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई. दोनों ने शादी करने का फैसला भी किया था, लेकिन युवती का आरोप है कि सुरेश ने विवाह का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में पारिवारिक एवं सामाजिक दबाव का हवाला देकर शादी से इनकार कर दिया. इससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई, जिसके बाद उसने परपा थाने में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने विवाह का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर सुरेश सेठिया को गिरफ्तार किया और उसे न्यायिक हिरासत में केंद्रीय जेल भेज दिया.

जेल में मिलने आती थी युवती-
करीब 7 महीने तक जेल में रहने के दौरान भी दोनों के बीच संपर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ. युवती लगातार उससे मिलने जेल आती रही. समय के साथ दोनों के बीच फिर से बातचीत शुरू हुई और उन्होंने अपने पुराने विवाद भुलाकर साथ जीवन बिताने का निर्णय लिया. इसके बाद दोनों ने विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) की अदालत में संयुक्त आवेदन प्रस्तुत कर विवाह की अनुमति मांगी. दोनों बालिग होने और अपनी स्वतंत्र इच्छा से विवाह करने की सहमति जताने के बाद अदालत ने जेल नियमावली के तहत विवाह कराने के निर्देश दिए.

जेल में सजाया गया मंडप-
न्यायालय के आदेश के बाद केंद्रीय जेल प्रशासन ने जेल परिसर में विवाह की पूरी व्यवस्था की. जेल के भीतर मंडप सजाया गया, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हिंदू रीति-रिवाज से दोनों का विवाह संपन्न कराया गया. इस अवसर पर दोनों पक्षों के परिजन, अधिवक्ता, जेल अधिकारी, पुलिसकर्मी और जेल स्टाफ मौजूद रहे. विवाह समारोह की सबसे भावुक तस्वीर तब सामने आई, जब जेल में पदस्थ एक आरक्षक ने कन्यादान की रस्म निभाई. जेल परिसर में पहली बार शहनाई गूंजी, मंगलगीत गाए गए और जेल की ऊंची दीवारों के बीच सात फेरों के साथ दोनों ने जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया.

दोनों एक-दूसरे से करते थे प्रेम-
विवाह के बाद सुरेश सेठिया ने कहा कि दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे, लेकिन परिवार के विरोध के कारण समय पर शादी नहीं हो सकी. मामला दर्ज होने के बाद वह जेल चला गया, लेकिन अब दोनों ने अपनी इच्छा से विवाह कर लिया है. उसे उम्मीद है कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह रिहा होकर अपनी पत्नी के साथ नया जीवन शुरू करेगा. वहीं युवती ने कहा कि शादी से इनकार होने के बाद उसने शिकायत दर्ज कराई थी, क्योंकि उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई थी. जेल में लगातार मुलाकातों के दौरान दोनों के बीच विश्वास फिर से कायम हुआ और उन्होंने विवाह करने का निर्णय लिया. अब वह चाहती है कि कानूनी प्रक्रिया जल्द पूरी हो और उसका पति रिहा होकर उसके साथ वैवाहिक जीवन शुरू करे.

मामले में अब आगे क्या होगा?
मामले के अधिवक्ता अवधेश झा ने बताया कि दोनों बालिग हैं और उन्होंने अपनी स्वतंत्र इच्छा से संयुक्त आवेदन प्रस्तुत किया था. न्यायालय ने सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद जेल नियमावली के अनुसार विवाह की अनुमति दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि विवाह हो जाने से आरोपी के खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरण स्वतः समाप्त नहीं होता. मामले में न्यायालय के समक्ष आगे भी कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी और अंतिम निर्णय कानून के अनुसार ही होगा.

केंद्रीय जेल जगदलपुर के जेल अधीक्षक एस.एल. नायर ने बताया कि न्यायालय के आदेश का पूरी तरह पालन करते हुए सभी कानूनी औपचारिकताओं के बाद विवाह संपन्न कराया गया. उन्होंने कहा कि जेल प्रशासन ने दोनों परिवारों की मौजूदगी में सभी धार्मिक और विधिक प्रक्रियाएं पूरी कराईं. हालांकि आरोपी की रिहाई केवल न्यायालय की आगामी प्रक्रिया और आदेश के बाद ही संभव होगी.

जगदलपुर केंद्रीय जेल में हुआ यह विवाह कई मायनों में अनोखा माना जा रहा है. एक ओर गंभीर धाराओं में दर्ज मुकदमे का आरोपी दूल्हा बना, तो दूसरी ओर उसी मामले की शिकायतकर्ता दुल्हन के रूप में उसके साथ सात फेरे लेती नजर आई. अदालत की अनुमति, दोनों की सहमति और कानून के दायरे में संपन्न यह विवाह यह भी बताता है कि न्यायिक प्रक्रिया अपनी जगह चलती रहती है, जबकि व्यक्तिगत निर्णय और वैवाहिक संबंध अपनी अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत स्थापित हो सकते हैं. फिलहाल यह अनोखी शादी पूरे बस्तर सहित देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है.

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