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Janmashtami 2026: जन्माष्टमी व्रत कैसे रखें? जान लें नियम, पूजा विधि और पारण का सही तरीका

इस साल जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा. अगर आप भी इस दिन व्रत रखने जा रहे हैं, तो चलिए आपको बताते हैं जन्माष्टमी में व्रत रखने की विधि के बारे में.

Janmashtami 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:49 PM IST

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन भक्त भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना करने के साथ व्रत रखते हैं. मान्यता है कि जन्माष्टमी पर पूरे श्रद्धाभाव और नियमों के साथ व्रत रखने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस साल जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा. अगर आप भी इस दिन व्रत रखने जा रहे हैं, तो चलिए आपको बताते हैं जन्माष्टमी में व्रत रखने की विधि के बारे में.

जन्माष्टमी व्रत के नियम
जन्माष्टमी व्रत रखने वालों को एक दिन पहले यानी 3 सितंबर से ही सात्विक भोजन करना चाहिए. व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहने की कोशिश करें. झूठ बोलने, क्रोध करने, किसी को दुख पहुंचाने और नकारात्मक विचारों से बचें.

जन्माष्टमी के दिन अन्न का सेवन नहीं किया जाता. भक्त अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार और दूध का सेवन करके व्रत रख सकते हैं. पूरे दिन भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण, भजन और पूजा करना शुभ माना जाता है. इस दिन ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करने और वाणी पर संयम रखने की भी मान्यता है.

निशिता काल में होगी कृष्ण पूजा
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी पर निशिता काल में पूजा करने का विशेष महत्व है. इस साल निशिता मुहूर्त रात 11:57 बजे से 5 सितंबर को 12:43 बजे तक बताया गया है. इसी दौरान बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाता है.

जन्माष्टमी पूजा की विधि
जन्माष्टमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में करीब 4:30 से 5:15 बजे के बीच उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें.

रात में निशिता काल के दौरान शंख और घंटियों की ध्वनि के बीच बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाएं. भगवान कृष्ण को पंचामृत से स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाएं और फूल, चंदन व माला से उनका श्रृंगार करें. इसके बाद उन्हें पालने में विराजमान कर लोरी सुनाते हुए झुलाएं.

अंत में भगवान को चरणामृत, पंजीरी, पंचमेवा, माखन-मिश्री, फल और मिठाइयों का भोग लगाएं. पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोल सकते हैं. कुछ स्थानों पर अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करने की परंपरा है, इसलिए अपने क्षेत्र की मान्यता के अनुसार व्रत खोलें.

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