एशिया का सबसे बड़ा इंदिरा गांधी ट्यूलिप गार्डन पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है. जहां पर ट्यूलिप के फूलों को देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग यहां पर पहुंचते हैं. जो 19 मार्च से खुलने जा रहा है. जो डल झील और ज़बरवान पहाड़ियों के बीच बसा हुआ है. जिसके चलते भी यहां पर भारी संख्या में सैलानी घूमने के लिए पहुंचते हैं.
देखने को मिलेंगे 1.5 मिलियन ज्यादा ट्यूलिप
ट्यूलिप गार्डन के प्रभारी इनाम-उल-रहमान ने पीटीआई के जरिए बताया कि इंदिरा गांधी ट्यूलिप गार्डन के ओपन होने से पहले वह इसके फूलों पर पोषक तत्वों का छिड़काव और मामूली मरम्मत जैसी तैयारियां करते हैं. साथ ही बताया कि इस बार ट्यूलिप शो के दौरान कई तरह के 15 लाख से ज्यादा ट्यूलिप देखने को मिलेंगे. इसके साथ ही जलकुंभी, डैफोडील्स, मस्करी और साइक्लेमेन जैसे अन्य वसंत फूल भी देखने को मिलेंगे. उन्होंने बताया कि इसे सिराज बाग के रूप में भी जाना जाता है.
कई ट्यूलिप रंगों का देखने को मिलेगा इंद्रधनुष
रहमान ने आगे बताया कि इस साल पीले, लाल, क्रिमसन, बैंगनी और सफेद समेत कई ट्यूलिप रंगों का इंद्रधनुष देखने को मिलेगा. साल दर साल हम इस उद्यान का विस्तार करते आए हैं. इस साल फाउंटेन चैनल का विस्तार किया गया है. उन्होंने ट्यूलिप गार्डन को दुनिया भर में बागवानी व्यावसायिकता का एक उदाहरण स्थापित करने की मांग की. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस गार्डन पर जबरवान पहाड़ों की छाया पड़ने से इस बगीचे को एक अच्छा माहौल देता है. लोग इस बगीचे को पसंद करते हैं. यहां पर ट्यूलिप को देखने के लिए पिछले साल दो लाख लोग पहुंचे थे, यहीं उम्मीद इस बार भी है.
पहले जाना जाता था सिराज बाग के रूप में
इस ट्यूलिप गार्डन को पहले सिराज बाग के रूप में जाना जाता था. 2008 में जम्मू और कश्मीर राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद ने इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन नाम रखा था. रहमान ने आगे बताया कि ट्यूलिप गार्डन को महज तीन से पांच सप्ताह के लिए खोला जाता है लेकिन इसकी देखरेख साल भर की जाती है. इस बगीचे को तैयार करने में साल भर काम करना पड़ता है. मई और जून महीने में इसकी कटाई की जाती है, जिसमें तीन महीने का समय लगता है. कटाई के बाद अक्टूबर महीने में मिट्टी की खुदाई की जाती है. फिर नवंबर में ट्यूलिप के पौधे लगाए जाते हैं. जिसमें पूरे साल माली व्यस्त रहते हैं. यह उद्यान करीब 1050 कनाल (52.5 हेक्टेयर) में फैला हुआ है. जिसकी शुरुआत 50,000 ट्यूलिप से हुई थी, जिसकी संख्या बढ़कर अब 15 लाख हो गई है.