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सरकारी सिस्टम का अनोखा मामला, 18 साल बाद जारी हुआ अपॉइंटमेंट लेटर, जॉइनिंग के लायक नहीं बचा उम्मीदवार

सरकारी नौकरी का सपना पूरा होने में आमतौर पर कुछ महीने या साल लगते हैं, लेकिन केरल के एक शख्स के मामले में यह इंतजार 21 साल लंबा हो गया. हैरानी की बात यह है कि जब नियुक्ति पत्र आया, तब तक उनकी नौकरी करने की उम्र ही निकल चुकी थी.

Appointment letter at Late age
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 02 जून 2026,
  • अपडेटेड 6:30 PM IST
  • 2005 में दी परीक्षा, 2026 में मिला नियुक्ति पत्र
  • उम्र सीमा पार होने से हाथ से निकली नौकरी

सरकारी नौकरी पाने का सपना देखने वाले लाखों युवाओं के लिए केरल से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने भर्ती प्रक्रिया की रफ्तार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मलप्पुरम जिले के रहने वाले 61 वर्षीय अब्दुल मजीद को सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र तब मिला, जब वह नौकरी करने की उम्र ही पार कर चुके थे. केरल पब्लिक सर्विस कमीशन (PSC) ने उन्हें पार्ट-टाइम जूनियर अरबी शिक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए एडवाइस मेमो भेजा, लेकिन यह पत्र उस भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने करीब दो दशक पहले आवेदन किया था.

2005 में दी परीक्षा, 2026 में मिला नियुक्ति पत्र
अब्दुल मजीद ने वर्ष 2005 में PSC की परीक्षा दी थी. उनका नाम चयन सूची में भी शामिल हुआ था. यह रैंक लिस्ट तीन साल तक वैध रही और 2008 में समाप्त हो गई. हालांकि, हैरानी की बात यह रही कि PSC ने 24 अप्रैल 2026 को उन्हें नियुक्ति के लिए एडवाइस मेमो जारी कर दिया. यानी रैंक लिस्ट खत्म होने के करीब 18 साल बाद उन्हें नौकरी का ऑफर मिला.

उम्र सीमा पार होने से हाथ से निकली नौकरी
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, अब्दुल मजीद 27 मई 2026 को 60 वर्ष के हो गए. मौजूदा नियमों के तहत इस उम्र के बाद सरकारी सेवा में प्रवेश संभव नहीं है. ऐसे में नियुक्ति पत्र मिलने के बावजूद वह नौकरी जॉइन नहीं कर सकते. मजीद का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में हुई असाधारण देरी की वजह से उनका रोजगार पाने का मौका छिन गया. उनका आरोप है कि संबंधित पद वर्षों तक खाली पड़ा रहा और समय रहते नियुक्ति नहीं की गई.

जन्मतिथि को लेकर भी उठाया सवाल
अब्दुल मजीद ने अपने दस्तावेजों में दर्ज जन्मतिथि पर भी आपत्ति जताई है. उनके SSLC प्रमाणपत्र में जन्मतिथि 27 मई 1966 दर्ज है, जबकि उनका दावा है कि वास्तविक जन्मतिथि 27 मई 1967 है. उनका मानना है कि यदि रिकॉर्ड में सुधार हो जाता है तो वह कम से कम एक वर्ष तक सेवा देने के पात्र हो सकते हैं. इस संबंध में उन्होंने राज्य के शिक्षा मंत्री और अन्य अधिकारियों को आवेदन भी दिया है.

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