मददगार पुलिसवाला! एडमिट कार्ड पर गलत दर्ज था सेंटर, 15 मिनट पर 10 किलोमीटर दूर सही सेंटर पर छात्रा को पहुंचाया

हाल ही में हुई NEET परीक्षा के दौरान एक छात्रा की समय पर मदद करके एक सब-इंस्पेक्टर ने मिसाल पेश की है. छात्रा के एडमिट कार्ड पर सेंटर गलत होने से उसकी परीक्षा छूट सकती थी लेकिन इस पुलिसवाले ने ऐसा नहीं होने दिया.

Representational Image
निशा डागर तंवर
  • नई दिल्ली ,
  • 20 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 12:53 PM IST
  • पुलिस ने पहुंचाया छात्रा को सही सेंटर तक 
  • 15 मिनट में तय की 10 किमी की दूरी

हाल ही में, नीट परीक्षा 2022 का आयोजन किया गया था. लेकिन परीक्षा के बाद से देशभर में विवाद शुरू हो गए हैं. कई छात्रों ने परीक्षा केंद्रों पर एंट्री के दौरान हुई बदसलूकी के खिलाफ आवाज उठाई है. हालांकि, इस नकारात्मकता के बीच एक ऐसी खबर भी है जो आपके चेहरे पर मुस्कान ले आएगी.  

दरअसल, केरल में एक छात्रा को एडमिट कार्ड पर सेंटर के नाम में गलती होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा. लेकिन पुलिस के काबिल जवानों का वजह से यह बच्ची अपना एग्जाम दे पाई. 

पुलिस ने पहुंचाया सही सेंटर तक 
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कन्नमंगलम, चेट्टीकुलंगारा की निवासी अर्चा दास अंबालाप्पुझा के एक स्कूल में अपने पेपर के लिए पहुंची थी. लेकिन अंदर जाने के कुछ समय बाद ही वह तुरंत परेशान हालत में स्कूल से बाहर आकर अपने पिता को ढूंढने लगी. पिता के न मिलने पर उसकी मदद, शहर के सब-इंस्पेक्टर टॉल्सन पी जोसेफ और ड्राइवर जोजी थॉमस ने की. को अलप्पुझा शहर के एसडीवी स्कूल तक पहुंचने में मदद की।

बताया जा रहा है कि अर्चा के एडमिट कार्ड पर अधिकारियों ने एसडीवी इंग्लिश मीडियम स्कूल को अंबालाप्पुझा के पास लिखा हुआ था, जबकि स्कूल वास्तव में अलाप्पुझा टाउन में अंबालाप्पुझा तालुक कार्यालय के पास था. जब अर्चा को पता चला कि वह गलत केंद्र पर पहुंच गई है, तो उनके होश उड़ गए. अर्चा दोपहर 12.50 बजे स्कूल पहुंची और उन्हें दोपहर 1.20 बजे हॉल में जाना था. 

15 मिनट में तय की 10 किमी की दूरी
एसआई टॉल्सन ने बताया कि अर्चा जब अंदर गई तो सहायक ने तुरंत एड्रेस को पहचान लिया और अर्चा को बताया. इसके तुरंत बाद अर्चा बाहर आकर अपने पिता के ढुंढने लगी. हालांकि, उसे अपने पिता नहीं दिखे. लेकिन टॉल्सन ने उसे परेशान देखकर पूरा मामला जाना और तुरंत उसे पुलिस जीप मे बिठाकर सही सेंटर पर ले गए.

उन्होंने 15 मिनट में 10 किमी की दूरी तय करके अर्चा को समय पर सेंटर पहुंचाया. अर्चा के पिता ने टॉल्सन को धन्यवाद दिया और कहा कि अगर वह नहीं होते तो उनकी बेटी की परीक्षा छूट जाती.

 

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