डिजिटल स्क्रीन और नशे की लत के प्रेमियों के लिए, जिला कलेक्टर का डंडा है 'कंदम क्रिकेट'

कैसे कंदम क्रिकेट की मदद से जिला करेक्टर दूर कर रहे युवाओं के नशे की लत. साथ ही डिजिटल स्क्रीन टाइम कर दे रहे लोगों को बेहतर सेहत.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 30 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 9:38 AM IST

गर्मियों की तपती धूप में सुनहरे रंग में रंगे धान के खेत, जो कभी गांव के बच्चों के क्रिकेट मैचों की गवाह हुआ करते थे, आज फिर से जीवंत हो उठे हैं. केरल के पठानमथिट्टा जिले के कलेक्टर प्रेम कृष्ण आईएएस ने एक अनोखी पहल की है, जो न केवल बचपन की यादों को ताज़ा कर रही है, बल्कि युवाओं को नशे की लत से दूर रखने का एक प्रभावी तरीका भी बन गई है.

कलेक्टर साहब का फील्ड में उतरना
कुछ दिन पहले का नज़ारा कुछ अलग था. जिला कलेक्टर प्रेम कृष्ण अपनी सरकारी गाड़ी से उतरे, लेकिन इस बार औपचारिक कपड़ों में नहीं. टी-शर्ट और ट्रैक पैंट पहनकर वे सीधे धान के खेत में पहुंचे. क्रिकेट खेलने के लिए. यह 'कंदम क्रिकेट' (धान के खेत में खेला जाने वाला क्रिकेट) का हिस्सा था, जो उनकी युवाओं को नशे से दूर रखने की अनूठी रणनीति है.

सोशल मीडिया से शुरुआत
कलेक्टर साहब ने हाल ही में फेसबुक पर एक संदेश पोस्ट किया. "बाहर आओ और खेलो." उनके इस संदेश ने पूरे जिले के बच्चों को आमंत्रित किया कि वे गर्मियों की छुट्टियों में डिजिटल स्क्रीन और बंद कमरों से बाहर निकलकर खुले मैदानों में पारंपरिक खेलों का आनंद लें. सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने खुद भी साथ खेलने का वादा किया था. अपने वादे के मुताबिक, वे वेट्टिप्पुरम के एक मैदान में गए और स्थानीय युवाओं के साथ क्रिकेट खेली. इससे जिले में एक वायरल आंदोलन की शुरुआत हुई.

जनता की भारी प्रतिक्रिया
उनकी पोस्ट में लिखी गई बात "धान का क्रिकेट (कंदम क्रिकेट) कोई छोटा खेल नहीं है" ने सैकड़ों लोगों के दिल छू लिया. कमेंट सेक्शन में लोगों ने अपने स्थानीय खेल के मैदानों की तस्वीरें और वीडियो शेयर करते हुए कलेक्टर साहब को अपने यहां आने का न्योता दिया.

प्रेम कृष्ण ने अपनी पोस्ट में लिखा, "यह सिर्फ एक मैदानी खेल नहीं है. यह हमारे बचपन को वापस पाने का, स्क्रीन की लत, और इससे भी बुरी, नशे की लत को छक्के और डाइविंग कैच के जोश से बदलने का मौका है."

बचपन की यादों से जन्मा विचार
यह विचार कलेक्टर साहब के अपने बचपन से आया था, जहां धान के खेत में क्रिकेट खेलना एक प्यारी यादों का हिस्सा था. उन्होंने ओनमनोरमा को बताया, "पहले जैसा नहीं रह गया है. अब बच्चे छुट्टियों में शायद ही घर से बाहर निकलते हैं. हालांकि कैंप और समर कोर्स हैं, लेकिन वे सबके लिए सुलभ नहीं हैं. हमें कुछ ऐसा चाहिए था जो सभी के लिए हो, कुछ ऐसा जिसमें ज्यादा संसाधन की जरूरत न हो, लेकिन मतलब बहुत हो."

व्यापक सामुदायिक भागीदारी
प्रतिक्रिया शानदार रही है. सिर्फ तीन दिनों में, फेसबुक पोस्ट को 200 से अधिक कमेंट मिले, जिनमें से कई के साथ ग्रामीण मैदानों में खेलने की तस्वीरें थीं. स्कूल के यार्ड से लेकर रबर के बागान तक, धान के खेतों से लेकर नदी के किनारे तक. कुछ तो जगह की कमी के कारण शांत गांव की सड़कों पर भी खेल रहे हैं. वीडियो दिखाते हैं कि लड़के अनुपयोगी जमीन तैयार कर रहे हैं और दोस्त सुबह के मैचों के लिए इकट्ठा हो रहे हैं जो साझा भोजन के साथ समाप्त होते हैं.

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