Gas Charge In Bill: अगर होटल बिल में जुड़ा है गैस चार्ज.. तो कोई जरूरत नहीं उसे भरने की, बस उठाएं ये कदम और बुला लें कंज्यूमर कोर्ट

जबसे गैस की कीमतें बढ़ी है, होटलों की परेशानी भी बढ़ गई है. उन्हें भी महंगाई का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इसकी वसूली वो कंज्यूमर से गैस चार्ज के रूप में कर रहे हैं, जो कि पूरी तरह अवैध है.

Gas Charge
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:23 AM IST

देश में एलपीजी की बढ़ती कीमतों के बीच एक नया ट्रेंड सामने आया है, जिसमें कुछ होटल और रेस्टोरेंट ग्राहकों के बिल में अलग से 'गैस चार्ज' जोड़कर फालतू पैसे वसूल रहे हैं. कई लोग इसे कॉमन समझ रहे हैं और बिल चुका रहे हैं, लेकिन सच यह है कि यह नियमों के खिलाफ है. अब इस तरह की वसूली पर सख्ती शुरू हो गई है और अधिकारियों ने इसे गैर कानूनी करार दिया है.

आसान शब्दों में समझें तो होटल या रेस्टोरेंट अपने सभी खर्च जैसे एलपीजी, बिजली या अन्य फ्यूल को पहले से ही खाने की कीमत में शामिल करता है. मेन्यू में जो कीमत लिखी होती है, वही आखिरी बेस प्राइस मानी जाती है. इसके ऊपर केवल टैक्स ही जोड़ा जा सकता है. ऐसे में बिल में अलग से कोई गैस चार्ज जोड़ना कंज्यूमर राइट्स के खिलाफ है और इसे कानूनन गलत माना गया है.

बिल में गैस चार्ज दिखे तो क्या करें?
अगर आपके बिल में इस तरह का कोई चार्ज नजर आता है, तो उसे नजरअंदाज करने की बजाय फौरन कार्रवाई करें. सबसे पहले रेस्टोरेंट स्टाफ से इस चार्ज के बारे में जानकारी मांगें. यदि जवाब से आप संतुष्ट न हो, तो उस चार्ज को हटाने के लिए कहें. बिल की फोटो या कॉपी अपने पास जरूर रखें और जरूरत पड़ने पर मैनेजर से बात कर लिखित रूप में डिटेल मांगे. ध्यान रखें, आपसे जबरदस्ती कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा सकता.

शिकायत कैसे करें?
अगर रेस्टोरेंट आपकी बात नहीं मानता, तो आप आसानी से शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इसके लिए नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन पर कॉल या ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है. इसके अलावा, मामला कंज्यूमर कोर्ट तक भी ले जाया जा सकता है. शिकायत के लिए बिल और बातचीत के सबूत संभालकर रखना जरूरी होता है. यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो उस रेस्टोरेंट या होटल पर कार्रवाई की जा सकती है.

संबंधित अधिकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसलिए अगर आपके बिल में गैस चार्ज जोड़ा जाए, तो चुप रहने की बजाय अपने अधिकारों का इस्तेमाल करें और सही कदम उठाएं.

 

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