कोटा में इस बार दीपावली पर मिट्टी के दीयों के साथ गाय के गोबर से बने दीपक भी घरों को रोशन करेंगे. खास बात यह है कि इन दीपकों की तैयारी सिर्फ पर्यावरण और पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके जरिए महिलाओं को रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की पहल भी की जा रही है.
गोबर को बनाया कमाई का जरिया
कोटा की डॉ. रूपा आनंद झा ने गाय के गोबर को रोजगार का माध्यम बनाने की शुरुआत की है. उन्हें इसकी प्रेरणा जयपुर में आयोजित गो महाकुंभ की प्रदर्शनी से मिली. वहां उन्होंने देखा कि गोबर से कई तरह के उपयोगी और धार्मिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. इसी दौरान उनकी मुलाकात ओमप्रकाश जी से हुई, जिसके बाद उन्होंने गोबर से उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग ली.
ट्रेनिंग के बाद डॉ. रूपा ने गोबर से धूपबत्ती, कंडे, हवन सामग्री और दीपक तैयार करना शुरू किया. अब उनका मुख्य फोकस गोबर से बने दीपकों पर है. दीपावली को देखते हुए इनकी मांग बढ़ने की उम्मीद है और इसी को ध्यान में रखते हुए उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है.
हैंडमेड मशीन से तैयार किए जा रहे दीपक
फिलहाल तीन तरह के दीपक तैयार किए जा रहे हैं, फैंसी दीपक, फ्लावर दीपक और लाइनिंग डिजाइन वाले दीपक. इन्हें तैयार करने के लिए डॉ. रूपा ने खुद एक हैंडमेड मशीन विकसित की है. मशीन पूरी तरह ऑटोमेटिक नहीं है, इसलिए उत्पादन की रफ्तार सीमित है, लेकिन इसी व्यवस्था ने महिलाओं के लिए रोजगार का नया रास्ता खोल दिया है.
पांच महिलाएं इस काम से जुड़ी हुई
एक महिला रोजाना करीब 250 से 300 दीपक तैयार कर लेती है. फिलहाल करीब पांच महिलाएं इस काम से जुड़ी हुई हैं. डॉ. रूपा का लक्ष्य इस दीपावली तक करीब दो से ढाई लाख गोबर के दीपक तैयार करने का है. आगे इस काम को और बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी है, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जा सके.
इस पहल को 'नारी शक्ति' ग्रुप और एनजीओ की ओर से भी सहयोग मिल रहा है. डॉ. रूपा का कहना है कि हाड़ौती क्षेत्र में गोबर से बने ऑर्गेनिक उत्पादों को लेकर अभी उतनी जागरूकता नहीं है, जितनी बड़े शहरों में देखने को मिलती है. ऐसे में उनका उद्देश्य केवल उत्पाद तैयार करना नहीं, बल्कि लोगों को पारंपरिक संसाधनों के नए इस्तेमाल और उनसे रोजगार के अवसर पैदा करने के बारे में जागरूक करना भी है.
डॉ. रूपा लोगों से इस दीपावली स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की अपील कर रही हैं. उनका कहना है कि गोबर से बने दीपक खरीदने से एक ओर पारंपरिक और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर इनसे जुड़ी महिलाओं के हाथों को काम मिलेगा.
इस तरह कोटा में गोबर से तैयार हो रहे ये दीपक इस दीपावली सिर्फ घरों को रोशन करने की तैयारी में नहीं हैं, बल्कि महिलाओं की मेहनत और आत्मनिर्भरता की नई कहानी भी लिख रहे हैं.
ये भी पढ़ें: