गैंगरेप के एक मामले में दो साल जेल में बिताने के बाद एक दिहाड़ी मजदूर लगभग दो महीने पहले ही बरी हुआ है. लेकिन जेल से आते ही एक ऐसा वाक्या हुआ कि दिहाड़ी मजदूर ने 10 हजार करोड़ का हर्जाना मांगा है. व्यक्ति मध्य प्रदेश के रतलाम जिले का रहने वाला है. उसने अदालत में एक याचिका दायर कर झूठा फंसाने के लिए 10,006.02 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा है.
30 वर्षीय कांतिलाल सिंह उर्फ कंटू को 2018 में रतलाम जिले की बाजना पुलिस ने दो अन्य लोगों के साथ दो बच्चों वाली एक महिला से गैंगरेप करने का मामला दर्ज किया था. कांतिलाल के वकील विजय यादव ने कहा, “उन्हें 23 दिसंबर, 2020 को गिरफ्तार किया गया था और 22 अक्टूबर, 2022 को बरी कर दिया गया था. उसने 666 दिन जेल में बिताए.”
झूठा निकला आरोप
कांतिलाल के मुताबिक, 2018 में उनके खिलाफ दर्ज कराए गए गैंगरेप के झूठे मामले के कारण उनके परिवार में मां, पत्नी और तीन बच्चे भुखमरी की ओर धकेल दिए गए थे और उनके बच्चों को पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था. हर्जाने का दावा करते हुए, यादव ने तीन पुलिस कर्मियों के अलावा, कांतिलाल और दो अन्य द्वारा सामूहिक बलात्कार किए जाने का आरोप लगाने वाली महिला के पति, मध्य प्रदेश राज्य के खिलाफ मुकदमा दायर किया है.
कांतिलाल ने लगाए क्या-क्या आरोप?
व्यक्ति का आरोप है कि वह इस दौरान भगवान की ओर से मानव को दिए गए उपहार, जैसे सेक्स से वंचित रहा. 35 साल के कांतिलाल भील का कहना है कि इन आरोपों और जेल ने उसकी दुनिया ही पलट कर रख दी. टाइम्स ऑफ इंडिया से हुई बातचीत में उसने कहा, '' मैं नहीं बता सकता कि मैंने उन दो सालों में क्या-क्या झेला है. मेरा परिवार इनरवियर भी नहीं खरीद सकता था. मैं भीषण ठंड में बिना कपड़ों के जेल में रहा.
कांतिलाल के वकील ने बिन फीस लिए उनका केस लड़ा. चूंकि केस झूठा निकला इसलिए अब वह चाहता है कि जेल में बिताए उसके हर दिन का हिसाब हो. पीड़ित ने याचिका में पुलिस पर 'झूठे, मनगढ़ंत और मानहानिकारक बयान' देने का आरोप लगाया है. उसने कहा कि उस पर लगाए गए आरोप ने उसके जीवन और करियर को बर्बाद कर दिया है. उसने कहा कि वह अपने परिवार का एकमात्र सदस्य है और जेल में उसे त्वचा रोग जैसी कई अन्य बीमारियां भी हुईं.
वकील ने क्या कहा?
कांतिलाल के वकील विजय सिंह यादव ने राज्य शासन और पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध 10 हजार 6 करोड़ 2 लाख रुपये का क्षतिपूर्ति दावा जिला एंव सत्र न्यायालय में पेश किया है. वकील का कहना है कि पुलिस और राज्य सरकार की वजह से कांतु का जीवन बर्बाद हो गया. उसे बेगुनाह होने के बावजूद जेल में प्रताड़ना सहनी पड़ी. कांतु के परिवार में उसकी बूढ़ी मां, पत्नी लीला और 3 बच्चे हैं. सभी की जिम्मेदारी उस पर है. कांति के जेल जाने से बच्चों की पढ़ाई-लिखाई छूट गई.
किस मामले में गिरफ्तार हुआ कांतिलाल?
मामला 18 जनवरी 2018 का है.पीड़िता ने बाजना थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. महिला ने आरोप लगाया कि वह भाई के घर जा रही थी और रास्ते में कांतिलाल ने लिफ्ट देने के बहाने उसे बाइक पर बिठा लिया. उसे जंगल ले जाकर उसके साथ गैंगरेप किया. पुलिस ने कांतिलाल को जेल भेज दिया जबकि कोर्ट ने उसे बरी कर दिया.