मास्टर प्लान! अब हर बंदर पकड़ने पर मिलेंगे 600, महाराष्ट्र सरकार की नई स्कीम के बारे में आपको पता है?

महाराष्ट्र सरकार ने इंसानों और बंदरों के बीच बढ़ते संघर्ष को देखते हुए एक खास मिशन शुरू किया है. इसके तहत आबादी में घुसने वाले बंदरों को पकड़ने पर पैसे दिए जाएंगे.

Maharashtra Monkey Capture Scheme
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 29 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:34 AM IST
  • अब बंदर बनेंगे कमाई का जरिया!
  • 600 इनाम वाली योजना लागू

महाराष्ट्र के कई इलाकों में इन दिनों इंसान और बंदरों के बीच टकराव एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है. खासकर कोंकण और पश्चिमी महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों में किसान परेशान हैं. इस बढ़ती चुनौती को देखते हुए राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. अब अगर कोई व्यक्ति बंदरों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर उन्हें जंगल में छोड़ता है, तो उसे प्रति बंदर 600 रुपये का इनाम मिलेगा. पहले यह राशि 300 रुपये थी, जिसे अब दोगुना कर दिया गया है.

क्यों बढ़ रही बंदरों की समस्या?
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इंसानों द्वारा बंदरों को खाना खिलाने की आदत और तेजी से बदलते शहरी माहौल ने इस स्थिति को और बिगाड़ दिया है. जब बंदरों को आसानी से भोजन मिलना बंद होता है, तो वे आक्रामक हो जाते हैं और आबादी वाले इलाकों में घुसने लगते हैं. यही कारण है कि अब केवल भगाने या डराने के बजाय उन्हें व्यवस्थित तरीके से स्थानांतरित करने पर जोर दिया जा रहा है. इस योजना में खासतौर पर रीसस मकाक और हनुमान लंगूर जैसी प्रजातियां शामिल हैं.

कब से लागू होगी योजना?
22 अप्रैल 2026 से लागू इस योजना के तहत बंदरों को पकड़ने के बाद उनका हेल्थ चेकअप किया जाएगा और फिर उन्हें इंसानी इलाकों से कम से कम 10 किलोमीटर दूर जंगलों में छोड़ा जाएगा. पूरी प्रक्रिया की निगरानी वन विभाग करेगा. बंदर पकड़ने का सबूत फोटो और वीडियो के तौर पर देना होगा. बंदरों को छोड़ते समय वन विभाग के अधिकारी की मौजूदगी भी जरूरी होगी.

बंदरों को सुरक्षित पकड़ना होगा
हालांकि बंदर को किसी भी तरह की चोट नहीं लगनी चाहिए. इस योजना की यह सबसे अहम शर्त है. इसके लिए केवल सुरक्षित जाल और पिंजरे का इस्तेमाल किया जाएगा. यानी सरकार ने साफ किया है कि बंदरों को सिर्फ सुरक्षित तरीकों जैसे जाल या पिंजरे से ही पकड़ा जाएगा. इसके अलावा, एक ऑपरेशन पर अधिकतम 10,000 रुपये तक ही खर्च किए जा सकेंगे, जिसमें ट्रांसपोर्ट और अन्य व्यवस्थाएं शामिल हैं. अगर इस दौरान किसी रेस्क्यू सदस्य को चोट लगती है, तो उसकी जिम्मेदारी खुद टीम की होगी.

ये भी पढ़ें

 

    Read more!

    RECOMMENDED