मेरठ के नीले ड्रम सौरभ हत्याकांड में दोषी सौरभ की पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को कोर्ट मौत की सजा सुना चुका है. लेकिन इस घटना से जुड़ा मकान आज भी बंद है. मकान के गेट पर पुलिस के द्वारा लगाया गया ताला लगा हुआ है. लगभग 70 साल के मकान मालिक ओमपाल ने किराए पर मकान सौरभ और मुस्कान को दिया था.
मकान बेचना चाहते हैं ओमपाल
मकान मालिक ओमपाल मकान को खुलवाना चाहते हैं, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी उनका मकान नहीं खुल पाया है. मकान मालिक ओमपाल का कहना है कि उनके बेटे की मृत्यु हो चुकी है. ओमपाल और उनकी पत्नी अब अकेले हैं. वह मकान को बेचना चाहते हैं, लेकिन जब तक मकान सीलबंद है, वह बिक नहीं रहा है. उन्होंने काफी प्रयास किए हैं, लेकिन अभी तक उनको कामयाबी नहीं मिली है. दोषियों को सजा हो गई, लेकिन मकान आज भी बंद है. जिस मकान के किराए से कभी ओमपाल और उनकी पत्नी का गुजारा चलता था, आज वही मकान उनके लिए परेशानी का सबब बन गया है.
पुलिस के पास है ताले की चाबी
ओमपाल का कहना है कि हत्याकांड के खुलासे के बाद पुलिस ने ही कमरे में और बाहर गेट पर ताला लगाया था. आज भी वही ताला कमरे और गेट पर लगा हुआ है. ताले की चाबी पुलिस के पास है.
200 गज के मकान में रहते हैं ओमपाल और उनकी पत्नी
ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर का यह मकान लगभग 200 गज का है और दो मंजिल बना हुआ है. इस मकान में 70 वर्ष के ओमपाल और उनकी 65 साल की पत्नी अकेले रहते हैं. मकान के ऊपरी हिस्से में दो किराएदार हैं और वहीं नीचे वाला हिस्सा उन्होंने सौरभ और मुस्कान को किराए पर दिया था.
साढ़े तीन हजार रुपये से शुरू हुआ था किराया
ओमपाल बताते हैं कि लगभग हत्याकांड से 3 साल पहले उन्होंने यह मकान साढ़े तीन हजार रुपए प्रति माह किराए पर दिया था. बाद में बढ़कर किराया 6 हजार हो गया था. मकान के दो रास्ते हैं. एक सामने की तरफ खुलता है और दूसरा पीछे की तरफ गली में खुलता है.
वकील करने पर भी नहीं निकला हल
ओमपाल बताते हैं कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों से बात की तो उन्होंने कहा मामला कोर्ट में है. इसके बाद उन्होंने वकील भी किया, लेकिन अभी तक उनकी परेशानी का कोई हल नहीं हुआ है.
18 महीने बाद भी वॉशिंग मशीन में पड़े हैं कपड़े
घटना को लगभग 18 महीना हो चुके हैं. जैसा 17 मार्च 2025 को मुस्कान मकान को छोड़कर गई थी, आज भी उसी हालत में है. घर के बाहर आज भी वही कपड़े टंगे हैं, जो मुस्कान और सौरभ के परिवार के हैं. वहां एक वॉशिंग मशीन भी रखी है, जो सौरभ मुस्कान के लिए लाया था. आज भी उसमें ऐसे ही कपड़े पड़े हुए हैं.
ओमपाल कहते हैं कि इस घटना ने उन्हें मानसिक, सामाजिक और आर्थिक हर तरह से तोड़ दिया है. वह शुगर, बीपी और हार्ट के मरीज हैं. उन्हें देखने में भी दिक्कत होती है. शरीर बहुत कमजोर हो गया है. आंखों की रोशनी भी बहुत कम हो गई है. वह ठीक से देखा नहीं पाते हैं. वह अपने मकान को बेचकर गांव जाना चाहते हैं.
पुलिस का ताला लगा होने से नहीं मिल रहा मकान का खरीदार
ओमपाल बताते हैं कि उनके मकान का कोई खरीदार नहीं मिल रहा है, क्योंकि जब तक पुलिस का ताला लगा है, तब तक इस मकान को कोई नहीं खरीदेगा.
ओमपाल बोले- सौरभ सीधा-साधा लड़का था
ओमपाल बताते हैं कि उनके पास सौरभ और मुस्कान दोनों ही मकान लेने आए थे. उन्होंने बताया कि सौरभ बहुत अच्छा सीधा-साधा लड़का था. मकान किराए पर दिलाने के लिए कुछ लोग भी मुस्कान और साहिल के साथ आए थे, जो इनके पहले किराएदार रह चुके थे.
ओमपाल बताते हैं कि मुस्कान को देखकर कभी ऐसा नहीं लगा कि वह ऐसा हत्याकांड को अंजाम दे सकती है. ओमपाल का नाम मुस्कान के साथ नशे की दवाई लाने के मामले में भी सामने आया था. जिस पर ओमपाल कहते हैं कि इंसानियत के नाते वह मुस्कान को अपने स्कूटी पर बिठाकर खैर नगर दवाई दिलाने गए थे. उनको नहीं पता कि दवाई का उसने क्या किया. लेकिन वह सिर्फ इंसानियत के नाते ही उसकी दवाई दिलाने अपनी स्कूटी पर साथ ले गए थे.
साहिल के घर आने-जाने पर मुस्कान ने बताया था भाई
हमने ओमपाल से पूछा कि क्या साहिल मकान में आता-जाता था और आपने कभी इस बारे में टोका, तो उन्होंने बताया कि साहिल को उन्होंने शाम को कई बार घर आते-जाते देखा. इस पर उन्होंने मुस्कान से बात की, जिसके बाद मुस्कान ने बताया कि वह उनका भाई है.
हरियाणा के रहने वाले हैं ओमपाल
ओमपाल बताते हैं कि समय पर किराया मिल जाता था, कभी किराए में कोई दिक्कत नहीं हुई. ओमपाल मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले हैं. उन्होंने बताया कि वह यहां मेरठ के खंदक बाजार में कपड़ों का कारोबार करते थे और इसी वजह से उन्होंने यहां घर बनाया था. उनका एक बेटा था, जिसकी शादी हो गई थी, लेकिन शादी के 2 साल बाद उसकी मौत हो गई. 25 साल का बेटा गुजर गया. बेटे की मौत के बाद बहू ने भी दूसरी शादी कर ली. बेटे का एक बच्चा था, उसकी भी मौत हो गई. उम्र बढ़ने पर अपना कारोबार भी बंद कर दिया. अब इसी मकान में किराए से गुजर-बसर करते हैं. उनका कहना है कि वह मकान बेचना चाहते हैं.
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