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पति की मौत के बाद कंधे पर आई फैमिली की जिम्मेदारी, गन्ने की खेती से चलाया घर का खर्च... नीलम मलिक की कहानी

मुजफ्फरनगर में नीलम मलिक 13 बीघा जमीन पर गन्ने की खेती करती हैं और परिवार का पालन-पोषण करती हैं. खेती से ही उन्होंने छोटे बेटे को पढ़ाया और पुलिसवाला बनाया. शादी के करीब 15 साल बाद एक सड़क हादसे में उनके पति भूपेंद्र मलिक की मौत हो गई थी. जिसके बाद फैमिली की जिम्मेदारी उनके कंधे पर आ गई.

Neelam Malik
संदीप सैनी
  • नई दिल्ली,
  • 27 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:21 AM IST

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की नीलम मलिक उन महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने मुश्किल हालात में भी हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने गन्ना मिल से मिलने वाले गन्ने के भुगतान और प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना से मिलने वाली आर्थिक मदद से घर का खर्च निकाला. नीलम ने दो बेटों की परवरिश की जिम्मेदारी खुद संभाली और 13 बीघा जमीन पर गन्ने की खेती करके परिवार का गुजारा किया. खेती की कमाई से बच्चों को पढ़ाया-लिखाया. अब छोटा बेटा यूपी पुलिस में भर्ती होने में कामयाब हुआ है. जबकि बड़ा बेटा खेतीबाड़ी में हाथ बंटाता है.

पिन्ना गांव की रहने वाली है नीलम-
नीलम मलिक की शादी साल 1992 में मुजफ्फरनगर जिले के पिन्ना गांव निवासी भूपेंद्र मलिक से हुई थी, उनके दो बेटे गौरव और शुभम हैं. शादी के करीब 15 साल बाद एक सड़क हादसे में उनके पति भूपेंद्र मलिक की मौत हो गई. इस घटना के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी नीलम के कंधों पर आ गई. 

13 बीघा में करती हैं गन्ने की खेती-
ऐसे मुश्किल समय में उन्होंने हिम्मत जुटाई और गन्ने की खेती के जरिए परिवार चलाने का फैसला किया. नीलम करीब 13 बीघा जमीन पर गन्ने की खेती करती हैं. खेती से सालाना लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये की आमदनी होती है. इसी कमाई से उन्होंने घर का खर्च चलाया और दोनों बेटों की परवरिश की.

खेती से बेटे को बनाया पुलिसवाला-
नीलम की मेहनत का नतीजा है कि उनका छोटा बेटा शुभम उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती हो गया है. वहीं, बड़ा बेटा गौरव खेती और पशुपालन के काम में मां का सहयोग करता है. नीलम ने सीमित आमदनी के बावजूद परिवार की जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी.

कैसा चलता है घर का खर्च?
नीलम बताती हैं कि पति के निधन के बाद से वह खुद परिवार से जुड़े फैसले लेती आ रही हैं. गन्ना मिल से मिलने वाले भुगतान के आधार पर वह खेती और घर के खर्च की योजना बनाती हैं. उनके लिए गन्ने की खेती सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि परिवार को आगे बढ़ाने का सहारा भी रही है. 

नीलम मलिक का कहना है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली 6,000 रुपये सालाना सहायता राशि से भी उन्हें आर्थिक मदद मिलती है. उनका मानना है कि यह राशि खेती और परिवार से जुड़े छोटे-मोटे खर्चों को पूरा करने में काम आती है.

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