बच्चों की अच्छी परवरिश करना हर माता-पिता के लिए बड़ी जिम्मेदारी है. हर पैरेंट चाहता है कि उसका बच्चा स्वस्थ और खुश रहे. लेकिन बच्चों की परवरिश का तरीका हर जगह एक जैसा नहीं होता. भारतीय और विदेशी पेरेंटिंग में भी काफी फर्क देखने को मिलता है. यह फर्क इतना होता है कि बच्चों की रोज की जिंदगी और सेहत पर भी असर डाल सकता है.
भारतीय और विदेशी पेरेंटिंग के बीच एक खास अंतर होता है. कई विदेशी माता-पिता वीकेंड पर बच्चों के साथ घर से बाहर समय बिताते हैं. वे बच्चों के साथ रनिंग, साइकिलिंग, हाइकिंग या ट्रैकिंग जैसी एक्टिविटी करते हैं. इससे बच्चों को खेलकूद के साथ नेचर के भी करीब रहने का मौका भी मिलता है.
भारत में कई परिवार वीकेंड पर बच्चों को मॉल या बाहर खाने के लिए ले जाते हैं. कई बार माता-पिता खुद भी घर पर फोन चलाने में बिजी रहते हैं. बच्चे अपने माता-पिता को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं. इसलिए अगर पैरेंट्स पूरा समय फोन पर बिताएंगे, तो बच्चों की स्क्रीन टाइम की आदत भी बढ़ सकती है.
बच्चों के लिए खेलना और दौड़ना बहुत जरूरी है. रोज कुछ समय बाहर खेलने से उनकी फिजिकल एक्टिविटी बढ़ती है. इससे वे ज्यादा एक्टिव रहते हैं. इसके लिए महंगे खेल या किसी खास जगह की जरूरत नहीं है. माता-पिता बच्चों के साथ पार्क में टहल सकते हैं. बैडमिंटन खेल सकते हैं या साथ में साइकिल चला सकते हैं.
बच्चों को केवल पढ़ाई और अच्छे नंबर लाने तक सीमित न रखें. उनके साथ वीकेंड को सिर्फ मॉल या मोबाइल तक सीमित न रखें. बच्चों के साथ बाहर जाएं और कुछ समय बिना फोन के बिताएं. यही छोटी आदतें बच्चों की रोज की जिंदगी को बेहतर बना सकती हैं.