शॉपिंग का नया ट्रेंड, बिना पैसे खर्च किए खरीदारी का मजा, Gen Z में लोकप्रिय हो रहे डोपामिन साइट्स, जानिए क्या है यह

दक्षिण कोरिया में GenZ के बीच डोपामिन साइडइट्स तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं. इनमें नकली फूड डिलीवरी ऐप शामिल हैं जहां लोग खाना ऑर्डर करते हैं लेकिन उन्हें असल में डिलीवरी नहीं मिलती.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 16 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:58 AM IST

रात के 2 बजे मोबाइल पर फूड डिलीवरी या शॉपिंग ऐप्स के नोटिफिकेशन आते ही कई लोगों का मन कुछ ऑर्डर करने का हो जाता है. दक्षिण कोरिया के युवाओं ने इस आदत से बचने के लिए एक नया तरीका खोज लिया है. वहां इन दिनों डोपामिन साइट्स तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं. ये ऐसी वेबसाइट्स हैं जो पूरी ऑनलाइन शॉपिंग का एक्सपीरिएंस देती हैं, लेकिन न तो पैसे खर्च होते हैं और न ही कोई सामान घर पहुंचता है.

इन प्लेटफॉर्म्स पर यूजर उत्पाद देख सकते हैं, उनकी जानकारी पढ़ सकते हैं, रिव्यू देख सकते हैं, सामान कार्ट में डाल सकते हैं और यहां तक कि ऑर्डर ट्रैक भी कर सकते हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि यह सब काल्पनिक होता है.

असली जैसी लगती है पूरी प्रक्रिया
डोपामिन साइट्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यूजर को बिल्कुल असली ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसा अनुभव मिले. यहां नकली प्रोडक्ट्स, स्टार रेटिंग, ऑफर और ग्राहक समीक्षाएं दिखाई जाती हैं. जब कोई व्यक्ति ऑर्डर करता है तो स्क्रीन पर एक वर्चुअल डिलीवरी एजेंट भी दिखाई देता है, जो मानो उसका सामान लेकर घर की ओर बढ़ रहा हो.

यूजर मैप पर उसकी लोकेशन भी ट्रैक कर सकते हैं. हालांकि आखिर में कोई पैकेट नहीं आता क्योंकि शुरुआत से ही यह पूरा एक्सपीरिएंस केवल एक सिमुलेशन होता है.

खरीदारी नहीं, खरीदारी का एहसास बेच रही हैं ये साइट्स
विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्लेटफॉर्म्स की सफलता का कारण इंसानी मनोविज्ञान है. अक्सर किसी वस्तु को खरीदने की उत्सुकता और उसका इंतजार करने की भावना, वस्तु मिलने से भी ज्यादा खुशी देती है. लोग डिजिटल दुनिया में संतुष्टि और मनोरंजन की तलाश करते हैं. डोपामिन साइट्स इसी जरूरत को पूरा करती हैं. यहां यूजर को खरीदारी का रोमांच तो मिलता है, लेकिन उसके लिए पैसे खर्च नहीं करने पड़ते.

कई यूजर्स का कहना है कि नकली खरीदारी करने के बाद उन्हें वैसी ही खुशी महसूस होती है जैसी असली शॉपिंग के बाद होती है. हालांकि यह संतुष्टि कुछ समय के लिए ही रहती है.

महंगाई और खर्च के दबाव से जुड़ा है यह ट्रेंड
दक्षिण कोरिया में जीवन-यापन की लागत लगातार बढ़ रही है. युवाओं पर खर्च और उपभोग का दबाव भी बढ़ता जा रहा है. ऐसे माहौल में डोपामिन साइट्स उनके लिए एक तरह का रियल लाइफ हैक बन गई हैं. वे बिना पैसे खर्च किए खरीदारी का पूरा अनुभव ले लेते हैं. इससे न तो बजट बिगड़ता है और न ही बाद में पछतावा होता है. यही वजह है कि यह ट्रेंड तेजी से युवाओं के बीच फैल रहा है.

हालांकि इस ट्रेंड को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ये साइट्स लोगों की खरीदारी की आदत को खत्म नहीं करतीं, बल्कि केवल उसका एक नया रूप पेश करती हैं. इससे शॉपिंग की लत या आर्थिक तनाव की मूल समस्या का समाधान नहीं होता.

 

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