100 साल पुराने आम के बाग ने दिलाया इस किसान को अवॉर्ड, इनकी खूबियां भी जान लीजिए

बसंत कुमार ने बताया कि वर्ष 1984 से उन्होंने खुद बाग तैयार करने का काम शुरू किया था. आज उनके हाथों से करीब 130 बीघा क्षेत्र में आम के बाग हो चुके हैं. उनके बागों में आम की 20 से अधिक प्रजातियां मौजूद हैं.

Rare Mango Varieties
राहुल कुमार
  • सहारनपुर ,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:36 PM IST
  • 100 साल पुराने पुश्तैनी बाग की करते हैं देखभाल
  • CM योगी ने किसान बसंत कुमार को किया सम्मानित

लखनऊ में आयोजित प्रदेश स्तरीय आम महोत्सव में सहारनपुर के मुजफ्फराबाद ब्लॉक के गांव रणडौल के किसान बसंत कुमार ने जिले का नाम पूरे प्रदेश में रोशन कर दिया. बागवानी की बेहतरीन तकनीक, दुर्लभ आम की किस्मों के संरक्षण और प्राकृतिक तरीके से बागों की देखरेख के लिए उन्हें प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें ट्रॉफी, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया. इस उपलब्धि से पूरे जिले में खुशी का माहौल है.

100 साल पुराने पुश्तैनी बाग की करते हैं देखभाल
72 वर्षीय बसंत कुमार ने बताया कि वे अपने बागों की देखभाल बच्चों की तरह करते हैं. उनके पास करीब ढाई एकड़ में फैला 100 साल से भी अधिक पुराना पुश्तैनी आम का बाग है, जिसे उनके पिता ने लगाया था और जो आज भी भरपूर फल दे रहा है. उन्होंने बताया कि वे बागों में प्रतिबंधित कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करते. समय-समय पर जुताई, खरपतवार की सफाई और प्राकृतिक तरीकों से पौधों की सुरक्षा करते हैं. पुराने पेड़ों को बचाने के साथ-साथ उनकी कलम तैयार कर नई पौध भी विकसित कर रहे हैं, ताकि यह विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके.

1984 से तैयार किए 130 बीघा में आम के बाग
बसंत कुमार ने बताया कि वर्ष 1984 से उन्होंने खुद बाग तैयार करने का काम शुरू किया था. आज उनके हाथों से करीब 130 बीघा क्षेत्र में आम के बाग विकसित हो चुके हैं. उनके बागों में आम की 20 से अधिक प्रजातियां मौजूद हैं. लखनऊ आम महोत्सव में वे अपने भतीजे योगेश और समधी विनोद पुंडीर के साथ 16 किस्म के आम लेकर पहुंचे थे. इनमें फजली, तोतापरी, मलियागिरि, मल्लिका, रामकेला, जाफरान, मालदा, लंगड़ा, चौसा, हाथीफूल समेत कई दुर्लभ और उत्कृष्ट किस्में शामिल थीं. जिला उद्यान अधिकारी द्वारा निरीक्षण और रिपोर्ट भेजे जाने के बाद लखनऊ से आई टीम ने भी उनके बाग का दौरा किया था.

'यह सम्मान पूरे जिले और गांव के किसानों का है'
सम्मान मिलने के बाद भावुक हुए बसंत कुमार ने कहा कि सबसे बड़ी खुशी इस बात की है कि मुख्यमंत्री ने मंच से सबसे पहले उनके गांव रणडौल और सहारनपुर का नाम लिया. उन्होंने कहा कि वे खुद को एक छोटा किसान मानते हैं, लेकिन यह सम्मान पूरे जिले और गांव के किसानों का सम्मान है. मुख्यमंत्री ने उन्हें शील्ड, प्रशस्ति पत्र और एक पौधा भी भेंट किया. बसंत कुमार का कहना है कि उनकी कोशिश रहेगी कि पारंपरिक बागवानी, आम की पुरानी दुर्लभ किस्मों के संरक्षण और प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को भी इससे जोड़ा जाए.

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