घर का बना देसी घी सिर्फ सबसे शुद्ध माना जाता है. इसके न्यूट्रिशन को बॉडी की अच्छी हेल्थ के साथ जोड़ा जाता है. आज बाजार में कई तरह के पैकेट वाले घी आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन जो प्योरिटी, खुशबू और सैटिस्फैक्शन घर के बने घी में होता है, वह कहीं और नहीं मिलता. लेकिन शायद आप मुश्किल ही जानते होंगे कि पुराने समय में घी को और भी ज्यादा खुशबूदार और लंबे समय तक सेफ्ली स्टोर करने के लिए कुछ खास देसी तरीके अपनाए जाते थे. उनमें से एक है घी बनाते समय पान के पत्ते का इस्तेमाल करना.
पान का पत्ता सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि अपने नेचुरल गुण की वजह से भी जाना जाता है. इसमें एंटीबैक्टीरियल क्वालिटी और नेचुरल खुशबू मौजूद होती है. जब इसे गर्म हो रहे मक्खन या मलाई में डाला जाता है, तो यह घी की कच्ची गंध को खत्म कर देता है और उसमें एक हल्की मीठी व ताजगी भरी सुगंध जोड़ देता है. इससे घी ज्यादा शुद्ध लगता है. लेकिन दादी-नानी वाले इस नुस्खे को किस तरह से इस्तेमाल करना है वह शायद आप नहीं जानते होंगे. तो चलिए आपको बताते हैं वो तरीका.
पान का पत्ता डालने का फायदा
घर में जब घी बनाया जाता है, तो अगर उसमें पकाते समय पान का पत्ता डाला जाए तो उसकी महक बेहद आकर्षक हो जाती है. साथ ही उसका रंग भी ज्यादा सुनहरा व साफ दिखाई देता है. पकाते समय इसकी सुगंध रसोई में एक अलग ही ताजगी भर देती है, जो पुराने दिनों की याद दिलाती है.
दादी-नानी की रसोई का अनमोल किस्सा
पहले के समय में जब फ्रिज जैसी सुविधाएं नहीं थीं, तब भी घर का बना घी महीनों तक खराब नहीं होता था. इसका वजह सिर्फ शुद्ध दूध नहीं, बल्कि बनाने की का तरीका भी था. दादी-नानी के समय से यह तरीका अपनाया जाता रहा है, जिसमें मक्खन को पकाते समय एक साफ पान का पत्ता डाल दिया जाता था. यह अनुभव से निकला ऐसा नुस्खा है जो पीढ़ियों से चला आ रहा है.
इस्तेमाल करने का सही तरीका
इस ट्रिक को अपनाना बेहद आसान है. मक्खन को कढ़ाही में गर्म करें, जब वह पिघलकर उबलने लगे तो उसमें एक साफ धुला हुआ पान का पत्ता डाल दें. इसे धीमी आंच पर 2–3 मिनट तक पकाएं और फिर पत्ता निकाल लें. इसके बाद घी को छानकर ठंडा होने दें और स्टोर करें. ध्यान रखें कि पत्ते को ज्यादा देर तक न पकाएं, वरना स्वाद कड़वा हो सकता है.